Audit in hindi

AUDIT notes in hindi and क्या होता है book aur meaning pdf kya hota hai aur social kaise karte hai types of then Management  ,officer, Audit meaning report of company.
what is audit?- यह एक systamatic(व्यवस्थित) और indipendent(स्वतंत्र) व documeted process होती है और इसके आलावा  कैसे कैसे ऑडिट करना चाहिए systematic point of view(दृष्टिकोण) होना चाहिए हम system को objectively (निष्पक्ष) evaluate (मूल्यांकन करना)करेगे audit evidence को collect करने के लिए।kya hota hai

audit kya hai,audit notes,management system,audit meaning,internal audit,officer,report,companyयह जानने के लिए की system हमारा काम कैसे कर रहा है मतलब audit का जो criteria है आप जिस purpuse के लिए audit कर रहे है आपने कुछ criteria define किया होगा। ऑडिट basically documental process को follow करते हुए indipendently systemetic approch (स्वतंत्र रूप से व्यवस्थित दृष्टिकोण) के साथ में जिस एरिया का आप audit कर रहे है वो आपके criteria को fullfill कर रहा है की नहीं इसे देखने के लिए  आडिट  किया जाता है।   

Audit basically साल भर organization में काम कैसे हो रहा है यानी की पूरे साल की जांच की जाती है इसमें  ऑडिट उन्ही लोगो का किया जाता है जो अपना business करते है। ऑडिट में साल भर का Details निकाला जाता है यह Income Tax Department करता  है। इसमें यह देखा जाता है की business में आपने income and  expense (आय और व्यय) नियनो के हिसाब से किये है या नहीं। इसके अलावा companiya खुद अपना internal ऑडिट करती रहती है। 

Types of Audits in hindi- 

Basically तीन प्रकार के ऑडिट होते है product, process एंड system AUDIT लेकिन इसके आलावा और ऑडिट होते है जो की इन तीनो ऑडिट को support करते है  जैसे एक ऑडिट को internal या external ऑडिट भी कहते है internal ऑडिट वह ऑडिट होता है जो की internally कनेक्ट किया जाता है मतलब यहा पर organization के लोग दूसरे dipartment में जाकर ऑडिट करते है internal ऑडिट कहलाता है। और external ऑडिट वह होता है जो बाहर के लोग होते है जो की organization का ऑडिट करते है इसे external ऑडिट कहते है। इसके आलावा।
1- product
2- process
3- system
4- dockaudit
5- layout audit
6- layered ऑडिट

  • Process audit in हिंदी -
Process audit में हम verification करते है की हमारा जो process  या हमने जो work decide किया था की हम अपना ये work इस work-instruction से करेंगे या हमने जो parameter set किया था तो क्या ये सारे parameters controlled condition में चल रहे है या नहीं चल रहे है क्योकि अगर process parameter सही नहीं होगा तो आपका output सही नहीं निकलेगा तो basically process ऑडिट में हम उन parameter को check करते है जैसे work-instruction, control plan इनके refrense से हम यह देखते है की हमारा जो parameters है वह सही condition में चल रहा है की नहीं चल रहा है। इसे कहते है process ऑडिट। 

इसमें हमने जो भी standard guidelines बनाये थे उन सभी guideline को follow किया जा रहा है की नहीं किया जा रहा है मतलब हमने अगर किसी एक work को पूरा करने के लिए 10 stap लगते है तो क्या ये 10 step follow हो रहे है या नहीं - कही पर बायपास तो नहीं किया जा रहा है इन सब steps को verify करना process audit कहलाता है। 
  • product ऑडिट
Product ऑडिट में हम processing होने के बाद में जो प्रोडक्ट निकलता है तब उनके Dimension को check किया जाता है। जो भी हमारा   control plan  या workinstruction में जो भी पैरामीटर हमने बनाये है उसके हिसाब से चेक करते है की ये सारे parameter सही थे या नहीं थे इसके अलावा parts की testing भी चेक की जाती है। 

  • System Audit 

system ऑडिट तीन प्रकार के होते है  first party audit, second party ऑडिट ,third party audit.


First party audit :- हम इसे  Internal Audit भी कहते है। organization या कंपनी खुद ही यह ऑडिट  कर सकती है अपने द्वारा या फिर किसी दुसरे agency को भी hire कर सकती है अपने Internal audit के लिए। किसी भी system में एक "Internal ऑडिट " का एक shedele होता है इसमें हर एक function का friquency के base पर audit किया जाता है।  यह किसी कंपनी में 3 month में एक बार या फिर 6 month में एक बार या फिर एक annualy साल में एक बार audit जरुर  किया जाता है। dearhindi.कॉम 

अगर आप internal ऑडिट कर रहे है तो आपने जो assissment किया है उस एरिया की process की system को नजर में रखते हुए frequency को dynamik रखिये जो function या process आपको ज्यादा critical नजर आता है ज्यादा problem है ज्यादा issue है उसकी frequency को थोडा high रखिये जहा पर problem कम है वहा आपको frequency थोडा कम कर लेना चाहिए। aur kya hona chahiye kya hai 

अलग अलग department में सभी aria का नाम लिखना होता है और फिर frequency decide किया जाता है की कौन कौन  से एरिया का कब कब ऑडिट किया जाय। अगर आप first time audit करते है तो आपको department का नाम कौन audit कर रहा है उसका नाम कब audit किया जायेगा उसका time and date fix किया जाता है।
Second party audit:- 2nd  time ऑडिट तब होता है जब कोई customer अपने supplyer के यहाँ audit करने जाता है second party AUDIT basically customer और suppyler के बीच में होता है customer suppyer का audit करता है second party audit में customer और suppyler का business relationship होता है। 

Third party ऑडिट :- इसमें एक external agency certification के purpuse से आपके कंपनी में ऑडिट करेगी काफी सारी agency है जो की आपके कंपनी का assessment (मूल्यांकन) करती है अगर आप criteria को fulfill करते है तो बाद में आपको इसका certificate दिया जाता है। third party audit में कोई business relationship नहीं होता है यह केवल certification के purpuse से आते है आपके system का assessment (मूल्यांकन) करते है। 
  • Layout audit-
Layout ऑडिट में हर एक dimension को identified किया जाता है और उन्हें चेक किया जाता है चेक करने के बाद जो report तैयार होती है उसमे हम देखते है की कोई issue है की नहीं है अगर कुछ issue पाया जाता है तो हम उसपर Action लेते है और उसको Improve करते है उसका layout तैयार करते है इसे कहते है layout ऑडिट। 
  • Layered ऑडिट
Layered ऑडिट में company के अलग अलग लोग audit करते है जैस किसी एक department का supervisor ऑडिट किया फिर बाद में HOD (head of department) ने ऑडिट किया इसके बाद में HR department  के लोग  ऑडिट करते है पूरे plant का head ऑडिट कर सकता है अलग अलग layer के लोग ऑडिट करते है इसलिए इसे लेयर्ड ऑडिट कहते है अलग अलग lable के लिए अलग अलग चेक लिस्ट हो सकती है या फिर single  चेक लिस्ट को crossverify भी कर सकते है।  
  • Dock-audit -  
Dock-audit में हमारा जो finish good material होता है जो की dishpatch condition में होता है और हम यहाँ पर product का verification करते है जैसे packaging सही होना चाहिए box damage condition में नहीं होना चाहिए sticker या lable सही से लगा हुआ होना चाहिए quantity short नहीं होना चाहिए कुछ भी चेक कर सकते है इस condition में product के verification को हम dock audit कहते है यहाँ पर cross verification किया जाता है 100 % verification नहीं किया जाता है। 

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