द्वारका गुजरात: भगवान श्रीकृष्ण की पवित्र नगरी
द्वारका भारत के गुजरात राज्य में स्थित एक अत्यंत प्राचीन, धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी है। इसे भगवान श्रीकृष्ण की नगरी कहा जाता है और यह हिंदू धर्म के चार धामों में से एक है। द्वारका न केवल एक तीर्थस्थल है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, पुराणों और महाभारत काल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थान भी है। हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन और भ्रमण के लिए आते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि द्वारका कैसे प्रसिद्ध हुआ, यहां कौन से देवता पूजे जाते हैं, यह कहां स्थित है, कैसे घूमा जा सकता है, कब जाना सबसे अच्छा रहता है और परिवार के साथ यात्रा कैसी रहती है।
द्वारका कैसे प्रसिद्ध हुआ?
द्वारका की प्रसिद्धि का सबसे बड़ा कारण भगवान श्रीकृष्ण हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब मथुरा में जरासंध के बार-बार आक्रमण होने लगे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने यदुवंशियों को लेकर पश्चिम दिशा में समुद्र के किनारे एक सुरक्षित नगरी बसाई। इसी नगरी का नाम द्वारका पड़ा।
महाभारत और पुराणों में वर्णन मिलता है कि द्वारका अत्यंत समृद्ध और भव्य नगरी थी, जहां सोने-चांदी के महल, चौड़ी सड़के और ऊंचे द्वार थे। श्रीकृष्ण के स्वर्गलोक गमन के बाद यह नगरी समुद्र में समा गई, इसलिए इसे “डूबी हुई नगरी” भी कहा जाता है। समुद्र के भीतर मिले अवशेषों ने द्वारका की ऐतिहासिकता को और मजबूत किया।
आज द्वारका हिंदू धर्म के चार धामों में पश्चिमी धाम के रूप में जानी जाती है, इसी कारण यह धार्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रसिद्ध है।
द्वारका के मुख्य देवता कौन हैं?
द्वारका के प्रमुख देवता भगवान श्रीकृष्ण हैं, जिन्हें यहां द्वारकाधीश या रणछोड़जी के नाम से पूजा जाता है। द्वारकाधीश मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की चतुर्भुज मूर्ति विराजमान है, जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म हैं।
इसके अलावा द्वारका और आसपास कई प्रमुख देवस्थल हैं:
- रुक्मिणी देवी मंदिर – भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मिणी को समर्पित
- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग – भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक
- भड़केश्वर महादेव – समुद्र के बीच स्थित शिव मंदिर
- हनुमान जी मंदिर – बेट द्वारका में स्थित
- त्रिविक्रम मंदिर – भगवान विष्णु का अवतार
ये सभी मंदिर द्वारका की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं।
द्वारका कहां स्थित है?
द्वारका गुजरात राज्य के देवभूमि द्वारका जिले में स्थित है। यह भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर के किनारे बसी हुई है। द्वारका गोमती नदी के मुहाने पर स्थित है, जहां नदी और समुद्र का संगम होता है।
द्वारका रेल मार्ग, सड़क मार्ग और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहां अपना रेलवे स्टेशन है और आसपास के बड़े शहरों से बस और टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है। समुद्र के पास होने के कारण यहां का वातावरण अलग ही शांति और ऊर्जा से भरा रहता है।
द्वारका का लोकेशन कैसा है?
द्वारका का लोकेशन बेहद सुंदर और आध्यात्मिक है। एक ओर विशाल अरब सागर की लहरें हैं, तो दूसरी ओर प्राचीन मंदिर और घाट। गोमती घाट पर सुबह और शाम का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है।
सूर्यास्त के समय समुद्र के किनारे खड़े होकर डूबते सूरज को देखना एक अद्भुत अनुभव होता है। शहर अपेक्षाकृत शांत है, जिससे यहां ध्यान और भक्ति का वातावरण बना रहता है। समुद्र के कारण यहां हल्की नमी रहती है, लेकिन हवा शुद्ध और ताजगी से भरी होती है।
द्वारका कैसे घूमें?
द्वारका घूमने के लिए आमतौर पर दो से तीन दिन पर्याप्त होते हैं। घूमने का एक अच्छा क्रम इस प्रकार हो सकता है:
- पहले दिन गोमती घाट में स्नान कर द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन
- निष्पाप कुंड और आसपास के छोटे मंदिरों का भ्रमण
- शाम को आरती और समुद्र तट पर भ्रमण
दूसरे दिन:
- बेट द्वारका की यात्रा, जहां नाव या फेरी से पहुंचा जाता है
- हनुमान मंदिर और रणछोड़जी से जुड़े स्थलों के दर्शन
तीसरे दिन:
- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
- रुक्मिणी देवी मंदिर
- भड़केश्वर महादेव और समुद्र किनारे विश्राम
स्थानीय घूमने के लिए ऑटो, टैक्सी और पैदल यात्रा काफी सुविधाजनक है।
द्वारका घूमने का सबसे अच्छा समय
द्वारका घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और मंदिर दर्शन व घूमने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती।
जन्माष्टमी के समय द्वारका का माहौल अत्यंत भव्य और उत्सवपूर्ण होता है, लेकिन इस दौरान भीड़ काफी अधिक रहती है। मानसून में समुद्र सुंदर लगता है, पर नाव सेवाएं कभी-कभी प्रभावित हो सकती हैं। गर्मी के मौसम में अत्यधिक तापमान के कारण यात्रा थोड़ी कठिन हो सकती है।
परिवार के साथ द्वारका यात्रा कैसी रहती है?
परिवार के साथ द्वारका की यात्रा बेहद सुखद और सुरक्षित मानी जाती है। यहां का वातावरण धार्मिक और शांत है, जो बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए अनुकूल है। मंदिर परिसर में अनुशासन बना रहता है और अधिकांश स्थान साफ-सुथरे हैं।
यहां शाकाहारी भोजन आसानी से उपलब्ध है और गुजराती थाली विशेष रूप से पसंद की जाती है। धर्मशालाएं और होटल परिवार के लिए उपयुक्त हैं। बच्चों के लिए समुद्र तट और नाव यात्रा आकर्षण का केंद्र होती है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए मंदिरों में बैठने और आराम की सुविधा उपलब्ध है, जिससे वे भी सहज रूप से दर्शन कर सकते हैं।
द्वारका के अन्य प्रमुख आकर्षण
- गोमती घाट – पवित्र स्नान और आरती के लिए
- सुदामा सेतु – आधुनिक पुल और सुंदर दृश्य
- डनी पॉइंट – प्रकृति प्रेमियों के लिए
- शारदा मठ – आध्यात्मिक अध्ययन का केंद्र
निष्कर्ष
द्वारका केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और प्रकृति का अनोखा संगम है। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी यह पवित्र नगरी हर व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। परिवार के साथ यहां की यात्रा न केवल यादगार बनती है, बल्कि जीवन में भक्ति और संस्कारों का भी संचार करती है।
यदि आप एक ऐसी जगह की तलाश में हैं जहां श्रद्धा, इतिहास और सुंदरता एक साथ मिलें, तो द्वारका गुजरात आपके लिए एक आदर्श गंतव्य है।


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