Quality kya hai quality policy in hindi गुणवत्ता पर निबंध

Quality kya hai quality policy in hindi गुणवत्ता पर निबंध
Quality kya hai quality policy in hindi गुणवत्ता पर निबंध
गुणवत्ता Quality kya hai -
जब भी हम कोई product खरीदते है तब हमारे मन में यह बात सबसे पहले आती है की कम से कम पैसो में अच्छी quality वाला product हमें मिले जैसे खाने का सामन हो या खेलने का सामान हो चाहे वह किराये का room हो या कपडे खरीदने की बात हो या फिर कोई दूसरा सामान जो हम purchase करते है सभी में अच्छी quality का सामान लेना पसंद करते है। अच्छी quality के सामान की मांग ज्यादा रहती है और वह लम्बे समय तक चलती भी है। 

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Quality Policy- किसी भी कंपनी में जब हम जाते है तो कंपनी के गेट पर board में उस कंपनी की quality policy लिखी हुई होती है क्यों की यह कंपनी के लिए बहुत जरुरी होती है इसे हमें जानना बहुत जरुरी होता है। इसे हमें जानना बहुत जरुरी होता है quality policy को समझने के लिए। 

हमें अपनी कंपनी में काम करने का तरीका कंपनी में क्या काम होता है और किस तरह की हम सोच रखते है इन  सब के बारे में वह हमें बताता है।

quality policy में company की common विचारधारा होती है और वह सब के लिए एक होती है चाहे वह किसी भी department में काम करता हो किसी भी level का काम करता हो। 

हम किसी भी company की quality policy पढेगे तो उसमे यह point आपको जरुर मिलेगे जिसमे सबसे पहला point होता है। 
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1 customer - ग्राहक
2 customer satisfaction- ग्राहकों की संतुष्टि और 
3.continuval improvement- निरंतर सुधार। 

1 customer - customer वह होता है जो आपकी servicess को ले रहा होता है आप किसी भी department में काम कारते हो production, quality, maintenense या HR आपका सबसे पहला मक्सद होता है customer satisfaction उसके लिए आपको यह जानना बहुत जरुरी होता है  की हमारा customer कौन है। और वह क्या चाहता है।

अगर आप quality के लिए काम करते है तो आपको यह ध्यान में रखना जरुरी है आपसे part handling करते समय पार्ट damage न हो और propper तरीके से रखा जाए जहा पर उसका निर्धारित स्थान है। अगर आप production में काम करते है तब आपको यह ध्यान में रखना जरुरी होता है की पार्ट time to time produced होना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा quandity में और जिस पार्ट की requirement quality department में है वह पार्ट available होना चाहिए एसा नहीं होना की जिस पार्ट की उन्हें जरुरत है वह time पे न मिले। यहाँ पर  कंपनी में जिस department के लिए काम करते है उसकी बात हो रही है। 

2. Customer Satisfaction-
किसी भी  business की  कमियाबी उसके  ग्राहक संतुष्टि से ही निर्धारित होती है कंपनी का customer कोई भी हो सकता है। हम सब जो काम करते हैं हमारे लिए inter department customer होते है जैसे maintenense के लिए production department, production के लिए quality और quality के लिए FG (Finish Good) store customer है इस तरह से कंपनी में internal customer होते है और हमारे लिए सबसे पहला काम वह होना चाहिए customer satisfaction. customer को कोई भी problem न हो time to time delevry दे और अच्छी quality में delevry दे। 

3 Continuval Improvementयहाँ पर हमसे उम्मीद की जाती है की हम अपने process को लगातार improve करते रहे उसमे लगातार सुधार करते रहे प्रकृति का एक नियम है change और change बहुत जरुरी है अगर हमें इस comptition में बने रहना है business में आगे बढ़ना है तो हमें अपने रोज के काम में लगातार सुधार लेकर आना चाहिए।

Quality Policy क्या है -

 गुणवत्ता नीति विचारो का वह धागा है जो हम सब को एक सूत्र में बाधकर रखता है और हम सबको एक दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करता है ताकि हम अपने अपने department में छोटी छोटी activity को जाने customer को जाने और उनके satisfaction को हासिल करने के लिए वचन बद्ध रहे और अपने कार्य में रोजाना सुधार लेकर आये ताकि हम अपने परिवार का अपनी कंपनी का पूरी दुनिया में नाम कर सके। 

यह quality policy की summary है जो हमें बताती है की हमें रोजाना काम करते समय अपने customer को ध्यान में रखना है और उसके satisfaction के लिए पूरी मेहनत  से काम करना है।
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Inspection plan kya hai Types of inspections in hindi

Inspection plan kya hai Types of inspection in hindi

Inspection plan kya hai-
 पने जो भी quality standard बनाया है मै यहाँ पर "quality inspection plan" की बात कर रहा हु अगर आपने control plan या work instruction बनाया है या check sheet बनाया है जो भी आपने quality standard बनाया है जिस quality standard के refrence से आप किसी product का मूल्यांकन (evaluation) कर रहे है की क्या यह product सही है या गलत है। 

मतलब हम उस component की quality check करके control करने की कोशिश कर रहे है इस process को कहते है "inspection" इसे हिंदी में निरीक्षण करना कहते है।  

inspection kya hai in hindi

Inspection करने के process में कोई न कोई document या कोई न कोई standard होना चाहिए कुछ layout description होना चाहिए की हमें इस component में हमें क्या क्या check करना है कैसे "inspection" करना है material कौन सा होना चाहिए तब उस quality standard के हिसाब से जानेगे कि  visual inspection करना है या किसी instrument जैसे vernier या माइक्रोमीटर का उपयोग करना है testing करना है किसी standard का use करके ही "inspection" किया जाता है इसे हम इंस्पेक्शन कहते है।
इंस्पेक्टर meaning report formate 
इंस्पेक्शन को manage करने के लिए किन किन चीजो का हने ध्यान देना चाहिए

who will inspected - Inspection कौन करेगा। 
why to inspect - Inspection क्यों करना। 
what to inspect - क्या Inspection करना है। 
what method of inspection - Inspection की क्या विधि है। 
when to inspect - कब Inspection करना है। 
where to inspect - कहाँ Inspection करना है। 

Inspection कौन करेगे - हमें पता है की हर एक Inspection level पर हर inspector qualified नहीं होता है अलग अलग stage के इंस्पेक्शन के लिए अलग अलग inspector qualified होते है inspector का skill matrix जिस level का होगा वह उस जगह पर Inspection करेगा। हमें skill matrix define करना पड़ेगा और फिर decide करना पड़ेगा की कौन सा inspector किस stage के लिए किस instruments से  check करने के लिए (qualified) योग्य  है। वह उस stage के लिए skillled है या नहीं है। हमें पता होना चाहिए। 

हम parts का  inspection क्यों करना चाहते है -हमे parts को (इंस्पेक्शन करने) check करने की क्या जरुरत है क्या supplyer parts का inspection नहीं कर रहा है हमें पता होना चाहिए की मै inspection क्यों करना चाहता हु। 

क्या इंस्पेक्शन करना है - कौन सा product check करना है online production का material check करना है या जो pending material है उसे check करना है।  आपको जिस product की requirement होगी उसके हिसाब से आपको parts का inspection करना होगा। 

मेरे इंस्पेक्शन करने का method क्या होगा - मुझे manual check करना है या visual check करना है किसी tools का उसे करना है जैसे vernier or micrometer या filler गेज से check करना है इसके बारे में हमें पता होना  चाहिए  

मै कब  check करू - हमें date और time inspection करने का फिक्स करना पड़ेगा। 

कहा पर check करू - incoming में Inspection करना है या inprocess में check करना है हमें यह पता होना चाहिए 

यह एक complete inspection process के लिए  इन सारे points को ध्यान में रखना है और plan करके process का (exicute) पालन करना है। 

हम क्यों करते है निरीक्षण (inspection)

इंस्पेक्शन करने के कई सारे कारण हो सकते है जैसे हमारा जो भी पार्ट है जिस round या lot में से लिया गया है तो क्या यह lot सही है मतलब मै check करना चाहता हु की यह componet इस lot का accept करने लायक है या नहीं या इस round में से कितने ok है और कितने not ok है। मतलब ok और not ok को अलग अलग करना भी प्राथमिक लक्ष्य हो सकता है इंस्पेक्शन का। 

हम जिस पार्ट का इंस्पेक्शन कर रहे है अगर उसमे कुछ defect निकलता है तो customer के पास में जाने से पहले हम उसे रोक लेगे जिससे हमारा defected material customer के पास नहीं जायेगे जिससे customer satisfaction बना रहेगा। 

अगर हमने inspection पार्ट का नहीं किया और वह आगे चला गया बाद में पता चला की वह पार्ट dimentional सही नहीं है पार्ट rejected है अगर हम पहले "Inspection" कर लेते तो यह defected पार्ट आगे नहीं जाता। इंस्पेक्शन करने से defected पार्ट को आगे जाने से रोका जाता है इससे time को west होने से बचाया जाता है जिससे हमारा quality maintain रहता है। 

अगर हम componet का(raw material का) "iqc-inspection" करते है मतलब incoming quality control करते है और हमें raw material में ही कोई defect दिखाई दे जाता है तब हमें उस पार्ट को आगे की process में नहीं लेना चाहिए। जिससे हमारा time बचेगा। इसलिए हमें incoming material का भी इंस्पेक्शन करना बहुत जरुरी होता है। 

हमें पता है की parts का इंस्पेक्शन करने से कोई भी extra value add नहीं होती है (inspection करने के पहले और inspection करने के बाद में पार्ट की कीमत में कोई फर्क नहीं पड़ता है) उस product में। लेकिन हमें इसे करना पड़ता है आगे generate होने वाली problems से बचने के लिए।

निरीक्षण inspection कब और कितने प्रकार से किया जाता है।

Types of inspections- in hindi

Manufacturing inspection- Manufacturing करते समय अलग अलग stage में inspection किया जाता है ताकि defected पार्ट manufactur न किये जाए और आगे न जाए। parts जो manufactur किये जा रहे है वह दिए गए standard के हिसाब से manufactur किये जा रहे है। अगर कुछ issue आ रहा है तो हम  उसे उसी stage में control कर सकते है। 

pre dispatch inspection (pdi)- सारे process complete होने के बाद पार्ट फाइनल stage में जाता है जहा पर फाइनल inspector or pdi inspector उसे check करके satisfy करेगा और dishpatch के लिए material को रेडी करेगा। अगर pdi stage पर ज्यादा parts में problems आ रही होती है तो  parts का 200 % inspection किया जाता है। इसे final inspection भी कहा जाता है। 

In-process inspection- Inprocess inspection में  production के बाद में parts को sampling base पर check किया जाता है। 

इसके आलावा fireall inspection किया जाता है। 

Third party इंस्पेक्शन- third पार्टी "inspection" भी industries में किया जाता है इसमें किसी agency या contract base पर जो भी कंपनी के employee नहीं होते है उन्हें hire किया जाता है जिसे हम third पार्टी इंस्पेक्शन कहते है। जो की हमारे under में वह parts का इंस्पेक्शन करते है।
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My Dear Meaning in hindi Dear ka matlab kya hota hai

My Dear Meaning in hindi Dear ka matlab kya hota hai

Meaning of Dear in hindi-हिंदी में Dear -प्रिय का मतलब क्या होता है ?

dear meaning in hindi

"Dear" एक ऐसी चीज है जिसे आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ अभिवादन के रूप में उपयोग करेंगे, जिसके आप शौकीन हैं। "dear" एक शब्द है जिसका अर्थ है प्रिय।

प्रिय-dear my dear meaning in hindi
यदि कोई व्यक्ति या कोई चीज आपको प्रिय है, तो इसका मतलब है कि आप उन्हें जानते  हैं या यह आपके दिल के बहुत करीब है, जैसे "मेरा देश मुझे बहुत प्रिय है" या "वह एक प्रिय मित्र है।"

पते के लिखित के रूप में - जैसे कि "डियर मिस्टर" "Dear mister"- प्रिय आमतौर पर विनम्र लेकिन अवैयक्तिक मानक अभिवादन है(impersonal standard greeting)। प्रिय को कभी-कभी महंगा मतलब हो सकता है, जैसा कि "इन दिनों भोजन की लागत बहुत प्रिय है," हालांकि यह आजकल उपयोग नहीं है। बच्चों, जानवरों या जानवरों के बारे में प्रयोग किया जाता है या अपर्याप्त क्यूटनेस के अन्य उदाहरण, प्रिय का अर्थ "मीठा" या "आराध्य" भी हो सकता है। इस अर्थ में, प्रिय दादी और अन्य संबंधों के पसंदीदा शब्द हैं।

Word forms: dearer, dearest, dears
शब्द रूप: प्रिय, प्रिय, धीर

अंग्रेजी में प्रिय की परिभाषा और अर्थ

1. संज्ञा से पहले विशेषण- adjective before noun

आप किसी ऐसे व्यक्ति या किसी चीज का वर्णन करने के लिए प्रिय-Dear का उपयोग करते हैं जिसे आप स्नेह महसूस करते हैं।
प्रिय-Dear

example-श्रीमती pooja मेरी एक प्रिय मित्र हैं।
Mrs Pooja is a dear friend of mine.

मेरी बहनें और भाई निकट हैं और प्रिय हैं.
my sisters and brothers are near and dear

2. लिंक क्रिया के बाद विशेषण adjective after link verb

यदि कोई चीज आपको प्रिय है या आपके दिल को प्रिय है, तो आप इसकी गहराई से परवाह करते हैं।

प्रिय  या प्यारा
example-उनका पारिवारिक जीवन उन्हें बहुत प्रिय था।
His family life was very dear to him.


3. व्यावसायिक संज्ञा-vocative noun

आप किसी प्रिय व्यक्ति को स्नेह की निशानी कह सकते हैं।
प्रिय-
  तुम मेरे लिए बहुत अच्छे हो प्रिय। 
You are very good for me dear

4  संज्ञा से पहले विशेषण adjective before noun

प्रिय को एक पत्र की शुरुआत में लिखा जाता है, उसके बाद उस व्यक्ति का नाम या शीर्षक जिसे आप लिख रहे हैं।
जैसे
माननीय श्री राजकुमार या प्रिय महोदय
Dear mr. rajkumar or dear sir. 
dear ka matlab hindi me or dear ko hindi me kya kahte hai thanks dear

5. विशेषण adjective

कुछ है जो प्रिय है बहुत सारा पैसा खर्च होता है।
क़ीमती-
यहाँ की टैक्सियाँ भी बहुत प्यारी हैं।

यह एक व्यक्ति के शिष्टाचार को दर्शाता है किसी को प्रिय के रूप में संबोधित करना आकर्षण या प्रेम से संबंधित नहीं है, यह व्यक्ति के लिए सम्मान को दर्शाता है। इस शब्द DEAR को विनम्र तरीके से लेना ज्यादा उचित है।

 मैं बहुत से लोगों को जानता हूं जो दूसरों को मीठा, प्रिय कहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे एक रिश्ते में हैं।

सामान्य तौर पर यदि दोनों ब्यक्ति पहले से ही एक दूसरे को जानते हैं, तो यह एक दूसरे को जानने और एक दूसरे का सम्मान करने का इशारा है। 

इसका मतलब सिर्फ इतना है कि वे एक-दूसरे के करीब हैं और हम सामने वाले की इज्जत करते है और उनका सम्मान करते है। हर कोई "प्रिय" का उपयोग कर सकता है  यह शब्द किसी रिश्ते तक सीमित नहीं। वास्तव में किसी को प्रिय-dear  कहना उनके मूड को बदल सकता है। Dear शब्द का उपयोग  आमतौर पर ईमेल / पत्रों में ज्यादा उपयोग किया जाता है। hellow my dear in hindi

dear ka matlab hindi me or dear ko hindi me kya kahte hai thanks dear

baisakhi festival बैसाखी क्यों मनाया जाता है in Hindi

Baisakhi festival बैसाखी क्यों मनाया जाता है in Hindi 
Baisakhi (vaisakhi) festival बैसाखी क्यों मनाया जाता है-

"Baisakhi" आमतौर पर हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है बैसाखी festival एक मौसमी उत्सव है यह पूरे भारत में और सबसे ज्यादा पंजाब और हरियाणा में लोगो द्वारा मनाया जाता है। इस समारोह में सभी लोग हिस्सा लेते है और यह festival फसल के मौसम के आगमन के लिए मनाया जाता है।  "baisakhi in hindi"

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बैसाखी सिखों का एक मुख्य  त्योहार है बैसाखी सिख धर्म में रहने के खलसा मार्ग को जन्म देता है यह सिख गुरु गोबिंद सिंह ने सिखों को खलसा में संगठित किया था। 

बैसाखी के दिन लोग नए नए कपडे पहनते है खाने में हलवा और मिठाई बनाते है बैसाखी festival में जगह जगह मेला आयोजित किया जाता है और यह मेला ज्यादातर नदी के किनारे पर आयोजित किया जाता है और इस दिन मेले में बहुत भीड़ होती है लोग इस मेले का आनंद उठाने के लिए हर जगह से आते है सिख समुदाय के लोग इस दिन को विशेष तरीके से मानते है वे गुरूद्वारे जाते है और पवित्र ग्रन्थ पढ़ते है और गुरुओ का आशीर्वाद प्राप्त करते है देश भर में school और office बैसाखी त्यौहार पर बंद कर दिया जाता है।
"baisakhi in hindi" essay poem lines
बैसाखी बड़ा ही पवित्र त्योहारों में से एक है इसे हमें ख़ुशी ख़ुशी एक साथ मानना चाहिए। 

दोस्तों बैसाखी की आप सभी को  ढेर सारी सुभकामनाए। बैसाखी का नाम मन में आते ही पंजाब की लहराती फसले याद आती है जो की हमारे किसानो की कड़ी मेहनत का नतीजा है। 

बैसाखी ( vaisakhi ) पर्व का इतिहास :-बैसाखी पर निबंध 

यह एक रास्ट्रीय त्यौहार है यह त्यौहार अप्रैल के महीने में मनाया जाता है इसे कृषि पर्व भी कहते है इस महीने किसानो की मेहनत सोने से चमकती हुई गेहू के रूप में प्राप्त होती है तभी गाव और शहरो में जगह जगह ख़ुशी प्रगट करने के लिए मेले लगाये जाते है।
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किसान अपनी फसलो को लहलहाते देख कर झूम उठते है सबसे बड़ी और खास बात यह है की सिखों के गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहीदी के बाद उसके बेटे श्री गुरु गोविन्द जी को जब उनके पिता की गद्दी मिली तब 13 अप्रैल 1699 के दिन एक सभा आयोजित की गई इस सभा का उद्येश था की लोगो के साहस और शक्ति को उजागर किया जाय और 13 अप्रैल 1699 के दिन ही खलसा पंथ की स्थापना की गई। 

यह सब करने का एक बड़ा उद्देश्य था क्योकि मुगलों के अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे थे दुश्मन के आगे शिर झुकाना नहीं बल्कि साहेश और शक्ति से केवल मुह तोड़ जवाब देना था इसलिए गुरु ने लोगो में शक्ति का संचार किया क्योकि मुग़ल हमारे देश को टुकडो में बाटने में लगे थे  उस समय यह जरुरत थी की लोगो की सोच एक की जाय ताकि दुश्मन हम पर हावी न हो सके।  

समाज तब अलग अलग धर्मो जातियों और सामाजिक स्थतियो के हिसाब से बटा हुआ था उस समय खलसा पंथ की स्थापना रास्ट्रीय एकता को दर्शाता है बैसाखी के दिन गुरु द्वारो पर विशेष उत्सव मनाये जाते है श्रद्धालु लोग गुरुद्वारों में आकर स्नान करते है और गुरु ग्रन्थ साहेब जी को माथा टेकते है। 

बैसाखी का पर्व हमें यह message देता है की सभी धर्मो से बड़ा धर्म इंसानियत का धर्म होता है इसके साथ ही सभी धर्मो को एक करना है और जातिवाद को समाप्त करना है। 

गुरु के अनुसार हम सब एक ही माला के मोती है जिस धागे में हम पिरोये गए है वह है प्रेम का अटूट बंधन इन त्योहारों के माध्यम से यह बंधन और मजबूत होता है। 
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vernier caliper and micrometer screw gauge least count formula

vernier caliper and micrometer screw gauge least count formula

vernier caliper-

Whether it is a small thing or a big thing to measure it, we need some instrument and some instrument has been made to measure it. Of which the vernier caliper is one, it is a device in which any object can be measured. micrometer

Use of Vernier Caliper:-  Measure the height to measure the diameter And the vernier caliper is used to measurement the depth. In this, we measure it on the basis of the difference between the two scale. It has the lowest count 0.02 mm or .001 "(inch), that means we can measure the readings of at least 0.02 mm or 0.001" (inch) from Vernier Caliper.

Main components of Vernier Calipers:-

Main scale, Vernier scale, Depth measureting bar, measuring jaws

Diagram of Vernier Caliper:-

vernier caliper diagram, digital


1. Out jaws (to measure the thickness of an object)

2. inside jaws (to measure the depth of an object)

3. depth probe (to measure the depth of an object)

4. Main scale (readings in cm are taken)

5. Main scale (readings are taken in the inch)

6. vernier scale (readings in cm are taken)

7. vernier scale (readings in the inch are taken)

8. Retainer (back to the arjest)

How to calculate the least count of the Vernier Calipers:- 
The 50 readings of Vernier Caliper are equal to reading 49 main scale. Then Vernier Caliper's list will count,

(1 main scale reading=1 mm )

(1 Vernier scale reading =49/50 mm=0.98 mm)

least count =1 main scale reading -1 Vernier scale reading
So finally our least count will be.
least count =1 mm- 0.98 mm 
least count =0.02 mm (This is the least count of Vernier Caliper)

How to read Vernier Caliper reading:-

Example
vernier caliper diagram and images with name
We have to use a formula for reading Vernier Caliper.

Dimension measured = main scale reading➕ (vernier scale reading ❌ least count)

  Here the main scale reading is 24mm. The reading of vernier scale is 35mm and the least count is 0.02.

Dimension measured = 24mm + (35mm ❌0.02mm)

Dimension measured = 24mm + 0.7mm

This is the final reading of our component = 24.7mm

Digital vernier caliper images-

Digital Vernier Caliper-
now-a-days it is used very much because the digital vernier caliper detects the accuracy of any object and is very accurate And in this, any small object can be measured.

digital vernier caliper
digital vernier caliper 

digital vernier caliper
digital vernier caliper images
what is micrometer and types of screw gauge how to use fuction out side parts Digital vernier caliper. 

What is micrometer-

As the name of the micrometer suggests only Micro means the smallest thing can be measured by it. From 0.1mm to micrometer Measure the measure of 100 times less.

Use of micrometer-

The use of the micrometer is used to measure length diameter and thickness of any small object. And it works on the principle of Nut and Bolt. And its least count (reads at least the readings easily)

it happens 0.01 mm OR 0.001 cm. The circular scale is of 100mm.

 Theory of Micrometer (Screw Gauge) -

If we have any thin sheet, then we can extract its thickness too. If we have any thin sheet, then we can extract its thickness to. For this we need screw gauge, it is also called micrometer.

Why is its name screw gauge? gauge means the diameter of something or how thick it is to measure it andThe screw meant that the texture is like a screwSo its full name was screw gauge.

What are the things we need to calculate the thickness of any object-
First need screw gauge second The object of which is to get us thickness And the third meter scale.

The screw of the screw gauge is rotated when clock wise.Then it goes onwards. And When it is rotated anti clock wise. Then it goes backwards. The circular which is made in the micrometer He passes near. And The space between all these is equal to one.The interval of the upper end between these two circles is the interval.We call them the gap between these two circlet intervals. Or It is also called pitch.

When we rotate one round to the circular scale, the clockwise or anti clockwise So this 0.5 mm to 1 mm will move forward or backward. Circular scale consists of 0 to 100 marks, This means 100 divisions on this circular scale.

Usually measured in millimeters (mm). A pitch of a screw gauge can be 0.5 mm or 1 mm. Screw gauge can be 0.5 mm or 1 mm according to the pitch Then the number of circular division can be 50 divisions or 100 divisions.

When we rotate one round to the circular scale So far as the liniar scale goes forward or behind, it tells the pitch. Or can say that the distance between the circlet is called a pitch. In the screw gauge we have, the distance between the two circlet is 1mm. The circular scale has been divided into 100 parts.

When we rotate this whole round, then it goes 1mm forward or backward. It means it's the least number of counts 100 mm of 1 mm or 1/100 means 0.01 mm.

then
least count =  1 /100 =  0.01 mm

If you rotate it half way Then it goes 0.5 mm forward or backward. It means  the least number of counts 50 mm of ०.5 mm or ०.5/50 means 0.01 mm.
then 
least count =  0.5 /50 =  0.01 mm

Main components of Micrometer-

1- Sleeve (main scale is above it)

2- Lock nut (Lock nut is used before reading, so that it does not shake)

3- Spindle (It is attached in the right side of the micrometer and it moves towards left and right.)

4- Anvil (It is located in the left side of the micrometer and it fixes in one place)

5- Frame (This is frame of micrometr. All components are connected to this frame)

6- Thimble (this is connected with the sleeve and has circular scale in it and circular scale is 50 mm scale)

7- Ratchet stop (This works to move the spindle)

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How to calculate the least count of the Micrometer-

When the thimble is rotated half the spindle then the spindle goes 0.5mm further. We call it pitch. Then the number of division on the circle scale will be 50mm.

Least count is a formula.

Least count = pitch of the micrometer / number of division on circle scale

Least count = 0.5/ 50 = 0.01mm

This is the Least Count (minimum count) of the micrometer.

When a full round of thimble is rotated then the spindle goes forward 1mm.Then the number of division on the circle scale will be 100 mm. Then it will be Lest count 0.01mm.

Least count = 1/ 100 = 0.01mm

This is the Least Count (minimum count) of the micrometer.

The low count = 0.5 / 50 or 1/100 = 0.01 mm or 0.001 cm.


How to read Micrometer reading-

We have to use a formula for reading Micrometer.

Dimensions  measured = Main scale reading +(Thimble scale reading 🗙 Least count)

We will have to use this method to measure any readings in Micrometer.

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As shown in the diagram Here we keep a small component between spindle and anvil. And set it with the help of thimble. And lock it with the help of lock nut. Then we read the main scale that (5 + 0.5) That is Our main reading is 5.5mm.The reading of thimble scale is 28 mm. We will set this reading in the formula.

Dimensions  measured  = main scale reading + (thimble scale reading 🗙 least count)

Dimention  measured  = 5.5mm +(28mm 🗙 0.01mm)

Dimention  measured = 5.5mm+ (0.28mm)

Final Dimention  Reading = 5.78 MM  This is  final reading of our component.
Vernier Caliper and Micrometer screw gauge least  count and formula what is micrometer and types of screw gauge how to use fuction out side parts Digital vernier caliper. 

captcha code in hindi - i m not a robot captcha code kya hota hai

captcha code in hindi - i m not a robot captcha code kya hota hai 

CAPTCHA CODE-

koi bhi website visit karege ya google pe website banayege tab aapko captcha code dekhne ko milege aur aap unhe fill bhi kiye hoge lekin kabhi aapne ye sacha hai ki yah hame kyo solve karne ko bola jaat hai Aur kyo hamara time wast kiya jaata hai Aur isse hota kya hai.

Yah captcha kya hai aur kyo laaya gaya aur isse hota kya hai 

captcha code kya hota hai hindi

captcha ka full form hota hai CAPTCHA

C- COMPLETELY
A-AUTOMATED
P- PUBLIC
T- TURNING TEST TO TELL
C-COMPUTERS AND 
H- HUMANS 
A-APART

Ise short me captcha kahte hai.

Isko laaya is liye gaya tha jitni bhi spaming ho rahi hai jo website ko kharab kar rahe hai bahut sare robots ghum rahe hai jo bahut sari website ko kharab kar rahe hai.

Kyo jaruri hai captcha code - EXAMLE AAPNE IRCTC ka name suna hoga india me jitni bhi train chalti hai us sab ka reservation online aap ghar baithe kar sakte hai sari train ke reservation isi train se hote hai.

AAp ko pata hota Tatkal ek esa system hai jisme aap train me safar karne ke ek din pahle  tatkal reservation kar sakte hai 10 Am AC class ka tatkal open hota hai aur 11 Am slipper class ka tatkal open hota hai.  Agar mujhe AC ta ticket tatkal lena hai to mai 10 AM IRCtc ki website par jauga login karuga train select karuga jisme travel karna hai apni sari detail enter karuga uske baad me payment karuga isme mujhe minumum 1 minut lag jayege ek ticket lene me.

lekin isse pahle kisi aur ne yah kar diya tab yah sari ticket khatam ho jayegi to agar mai ek programmer hu aur mera dimag koding me chalta hai to mai ek script bana sakta hu ya  kah sakte hai ki ek robot bana sakta hu tab mujhe bus ye karna hai ki mujhe bus yah sari detail us scrip me daal kar rakhuga aur jaise hi TATKAL reservation ka time 10 Am open hota hai tab mai us scrip ko run kar duga tab automaticly jo chiye mujhe 10 Am ke baad manualy karni thi wah ab meri acrip karegi ya robot karega matlab Log in se lekar payment tab yah sab scrip se ho jayega. 

IRCtc tatkab ka reservation lene me mujhe jaha 1 minut lahne wale the wah us scrip se ya robot se kuch hi second me ho jayeg. jaha par mujhe 1 minut lagne wale the ab wah mai kuch hi seconds me kar luga.

yaha par sabse badi problem  yahi tha sari websites ko ki kaise pata lagaya jaaye ki wah ek aadmi hai ya robots jo hamari website ko chala raha hai.

kyoki agar scrip code ban gaya tab to Tatkal open hote hi khatam ho jayega logo tak chije nahi pahuch payegi tab yaha par ek concept laaya gaya captcha code ka .

CAPTCHA CODE Ko Kyo Laaya Gaya -  captcha code ko isliye laaya gaya taki jitni bhi spaming ho rahi hai bahut sare robots ghum rahe hai jo sari website ko krab kar rahe hai ek hi click me lakho resistration kar rahe hai gmail id lakho ban rahi hai in sab ko rokne ke liye ho captcha code ko laaya gaya tha.

captcha code se yah pata lagaya jaata hai ki aap ek human ho ya ek robots ho. iske piche jo technology use hoti hai ki kaise pata lagaya jaay aur 2003 me yah captcha design kiya gaya isme screen par alag alag letters dikhaye jaate hai aur human apni akho se dekh sakta hai words ko bend karke dikhaya jaata hai taki agar koi robots use read kare tab usko samajh na paaye aur human  apni aakho se dekh kar aur samajh kar use submit kare.

iske baad ise aur advance  banaya gaya jise re-captcha kahte hai.

Google ne 2009 me recaptcha company ko kharid liya ab google ne ise aur achha banane me lag gaya kyo ki baar baar logo se text likhwaana bahut hi boring sa kaam hai kyo ki logo ka isme time west hota hai. 

Tab google ne ek naya captcha launch kiya jiska name hai Nocaptcha Recaptcha ese captcha aapko google ki website par mil jaayege jisme likha hota hai I AM NOT A ROBOT. ISME aapko bus click karna hota hai aur agar ek baar me right click a jaaya hai tab aap us lable ko paar kar jaate hai. Ab daute yah hoga aapko ki agar mai click karta hu to koi robots bhi click kar sakta hai aur us level ko paar kar sakta hai. 

recaptcha i am not a robot hindi


Yaha par jab aap click karte hai tab bahut sari information aapke computer ya mobile se google tak pahuch jaati hai jaise aapki ip address aap kis location me ho aur aap jab click liya tab aapka curser point kis situation me click point tak aaya straight aaya ya bend ho kar aaya aur us page par kitne samay se ho. yah sari information jaati hai googlr ke server pe machin ke thruw pata lagaya jaat hai ki aapka behavior kaisa hai matlab human ka hai ya robot ka hai.

agar 95 % google ko lagta hai ki wah ek human hai to wah waha par click kar dega aur aap us level ko pass kar jayege yah sab kuch hi mini second me hota hai. agar agar google ko laga ki yaha ek robot hai tab aapko images dikhai jayegi aur aapko car ya road ko point karne ko kaha yayega uske baad aap yah karne ke baad aap ise pass kar payege yaha par ise Nocaptcha kaha jaata hai  yaha par aapko kuch bharna nahi padta hai bus click karke app us level ko pass kar jaate ho. 

Captcha code ko kyu use kiya jaata hai

captcha  ek tarah se spaming ko rokhne ke liye use kiya jaata hai. iska upyg security ke roop me kiya jaata hai jise kewal insan hi solve kar sakte hai kyu ki yah baar baar change hota rahta hai isliye ise robots solve nahi kar sakte hai.

CAPTCHA Code ko kaise solve Kare

Agar aap kisi website par visit karte hai aur aapse captcha fill karne ko bola jaata hai aapke samne ek captcha code dikhai deta hai jaha par image me kuch characters likhe hote hai tab aap us character ko fill ya type karte hai.

 Aur agar aapka type kiya hua chacter match kar jaata hai tab aap website me aage enter kar sakte hai. Aur yadi aapka likha hua captcha code match nahi karta hai tab aapke samne ek naya captcha code automatically aa jaata hai tab aap ise achhe se dekhkar fill kariye. yahi baar baar chalta rahta hai.
captcha code in hindi - i m not a robot captcha code kya hota hai 

sunday holiday रविवार को ही छुट्टी क्यों मनाई जाती है जानकारी hindi में

Sunday Holiday रविवार को ही छुट्टी क्यों मनाई जाती है-  sunday holiday ravivar ko chutti kyun hoti hai jankari hindi me 
सबको sunday का बड़ी बेसब्री से इन्तजार रहता है लेकिन अगर कोई हमसे पूछता है की (sunday) रविवार को छुट्टी क्यों मनाई जाती है?  इसके बारे में शायद ही आप सभी को पता हो। कई बार interview में भी पूछ लिया जाता है की रविवार को ही क्यों मनाई जाती है छुट्टी

sunday-ravivar-holiday-hindi

रविवार का दिन भारत के लोगो के लिए बहुत ही खास माना जाता है। रविवार को सभी देशो में छुट्टी मनाई जाती है लेकिन कुछ देश है जहा पर sunday को छुट्टी (holiday) नहीं मनाया जाता। 

पूरे हफ्ते काम करने के बाद हम सभी को रविवार का इन्तजार रहता है क्योकी sunday को सभी दफ्तर school  और college बंद रहते है। पर क्या आपने कभी एसा सोचा है की आखिर sunday को ही क्यों छुट्टी मनाई जाती है चलिए जानते है कि sunday को ही क्यों holiday मनाया जाता है क्या कारण है की हम सब को रविवार को ही क्यों छुट्टी दी जाती है। sunday holiday रविवार को ही छुट्टी क्यों मनाई जाती है sunday holiday ravivar ko chutti kyun hoti hai jankari hindi me

sunday-रविवार का इतिहास - History of Sunday 

जब भारत में ब्रिटिश शासन किया करते थे तब company में काम करने वाले मजदूरों को week के सातो दिन काम करना पड़ता था और उन्हें कोई भी छुट्टी (Holiday) नहीं मिलती थी हर sunday को ब्रिटिश अधिकारी चर्च जाकर प्रार्थना करते थे लेकिन काम करने वाले मजदूरों के लिए एसी कोई परंपरा नहीं थी। 

 उस समय श्री नारायण मेघाजी लोखंडे मील मजदूरों के नेता थे उन्होंने ही ब्रिटिश के सामने सप्ताहिक छुट्टी का प्रस्ताव रखा और कहा की week में 6 दिन काम करने के बाद एक दिन अपने देश और समाज की सेवा करने के लिए भी छुट्टी मिलना चाहिए। 

sunday-ravivar-holiday-hindi;श्री नारायण मेघाजी लोखंडे

इसके आलावा उन्होंने कहा की रविवार हिन्दू देवता का दिन है इसलिए sunday को साप्ताहिक छुट्टी Holiday के रूप में घोषित किया जाना चाहिए लेकिन उनके इस प्रस्ताव को ब्रिटिश अधिकारियो ने अस्विकार कर दिया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपना संघर्ष जारी रखा और अंत में 10 जून 1890 को ब्रिटिश सरकार ने रविवार को छुट्टी का दिन घोषित कर दिया। 

1844 में अंग्रेजो के गवर्नर जर्नर ने पढ़ने वाले बच्चो के लिए रविवार को छुट्टी देने का प्रावधान किया। जिसका कारन यह था की student इस दिन कुछ अलग कार्य कर सके और अपने आपको आगे बढ़ा सके। 

लेकिन भारत सरकार ने इसके बारे में कोई भी आदेश जारी नहीं किये है अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन ISO (International Organization for Standardization) के अनुसार रविवार का दिन सप्ताह का आखरी दिन होता है इस बात को 1986 में लागू किया गया था। 

हिन्दू calender के अनुसार - सप्ताह की शुरुआत रविवार से ही होती है यह दिन सूर्य देवता का  दिन होता है हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान् सहित सभी देवतावो का पूजा करने का विधान है। सप्ताह के पहले दिन ऐसा करने से सारा सप्ताह मन शांत रहता है किसी भी प्रकार की परेशानी उत्पन्न नहीं होती है और किसी भी व्यक्ति को यह परंपरा निभाने में कोई भी problem न हो इसलिए रविवार को अवकाश माना जाता है। 

कुछ देशो में सप्ताह में sunday के अलावा छुट्टी होती है लेकिन ज्यादातर देशो में sunday को ही छुट्टी मानाने का प्रावधान है इसके पीछे का कारन यही था की सब को सप्ताह में एक दिन आराम मिलना चाहिए। अंग्रेजो ने 1843 में छुट्टी का आदेश निकाला था उसके बाद यह भारत तक पंहुचा। sunday holiday रविवार को ही छुट्टी क्यों मनाई जाती है sunday holiday ravivar ko chutti kyun hoti hai jankari hindi me

Vernier Caliper और micrometer क्या होता है

Vernier Caliper और micrometer क्या होता है  definition, इसका least count 0.02 mm or .001 (inch)होता है training,ppt,pdf dial difinition   alpatmank experiment  observation excercise
vernier caliper - चाहे छोटी चीज हो या बड़ी चीज इन्हे measure करने के लिए हमें किसी न किसी instrument की जरुरत पड़ती है और इन्हे मापने के लिए कोई न कोई instrument बनाया गया है जिनमे से vernier कैलिपर एक है यह एक ऐसी device है जिसमे किसी भी object को measurement किया जा सकता है।

Vernier Caliper (वर्नियर कैलिपर) का use - Height (ऊंचाई) को measure  करने के लिए diameter (व्यास) को measure करने के लिए और depth (गहराई) को measurement करने के लिए use किया जाता है।  इसमें हम दो scale के बीच का जो अंतर होता है उसके base पर हम इसको measurement करते है।  इसका least count 0.02 mm or .001"(inch) होता है। यानी हम Vernier Caliper से कम से कम 0.02 mm or 0.001"(inch) की reading को measurement कर सकते है। parts of vernier caliper and its uses.formula of scale pdf ppt dial scale.vernier caliper use in hindi, scale in inch and video in hindi.diagram and difinition experiment  observation excercise
Vernier Calipers के main components:-
 main scale , vernier  scale , depth measuring bar, measuring jaws

vernier caliper

Vernier Calipers का diagramvernier caliper diagram

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Img src: wikipedia

1. outside jaws (किसी वस्तु की  मोटाई को measure करने के  लिए)
2. inside jaws (किसी वस्तु के अंदर की गहराई को measure  करने के लिए)
3. depth probe (किसी वस्तु की गहराई को measure करने के लिए)
4. main scale(इसमें cmमें रीडिंग ली जाती है)
5. main scale(इसमें inch में रीडिंग ली जाती है)
6. vernier scale (इसमें cm में रीडिंग ली जाती है)
7. vernier scale (इसमें inch में रीडिंग ली जाती है)
8. retainer (आगे पीछे arjest  करने के लिए)

Vernier Calipers का list count कैसे निकाला जाता है :-

 Vernier Caliper की जो 50 readings होती है वो 49 main scale की reading के बराबर होती है। तब Vernier Caliper  का list count होगा ,

(1 main scale reading=1 mm )
(1 Vernier scale reading =49/50 mm=0.98 mm)

least count =1 main scale reading -1 Vernier scale reading
तो finally हमारा  least count  होगा।

least count =1 mm- 0.98 mm 
least count =0.02 mm (यह Vernier Caliper का least count होता है )
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 Vernier Caliper पे reading कैसे लेते है :-
Example 

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Vernier Caliper की reading लेने के लिए हमें एक formula का use  करना पड़ता है।

Dimension measured = main scale reading➕(vernier scale reading ❌ least count )

 यहा पर main scale की reading 24mm vernier scale  की reading 35mm  और least count 0.02 है। 

Dimension measured =24 mm + (35 mm0.02 mm)

Dimension measured = 24 mm + 0.7 mm

यह हमारे component की Final reading है  = 24.7 mm

Digital vernier caliper images-
Digital वर्नियर कैलिपर-आजकल  इसका उपयोग बहुत ही ज्यादा किया जाता है क्योकि digital vernier caliper में किसी भी वस्तु का Measurement accurate और बहुत ही जल्द पता चल जाता है और इसमें किसी भी छोटी से छोटी वस्तु का  measurement  किया जा सकता है। 


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Digital vernier caliper-


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what is micrometer? micrometer क्या होता है ?


Micrometer क्या होता है ?-

Micrometer जैसे  की नाम से ही पता चलता है Micro मतलब अति सूक्ष्म  छोटे से भी छोटी चीज को इसके द्वारा मापा जा सकता है। micrometer से हम 0.1mm से 100 गुना कम की माप को  भी माप सकते है।  

Micrometer  का उपयोग :-

माइक्रोमीटर का उपयोग  किसी भी small object कि लम्बाई (length) व्यास (diameter) और मोटाई (thickness) को measure करने के लिए उपयोग किया जाता है और यह Nut and Bolt के सिद्धांत पर काम करता है और इसका least count (कम से कम reading को आसानी से माप सकता है) 
0.01 mm OR 0.001 cm होता है। circular scale में  100 mm की होती है। 


Micrometer (Screw Gauge) Theory :- 

अगर हमारे पास कोई भी पतली शीट है तो हम उसकी मोटाई  भी निकाल सकते है। किसी पेपर की कितनी मोटाई है यह पता कर सकते है इसके लिए हमें screw gauge की जरुरत पड़ेगी इसे micrometer भी कहते है। 
इसका नाम screw gauge क्यों है। gauge मतलब किसी चीज का diameter या वो कितना मोटा है इसको नापना और screw का मतलब हुआ इसकी जो बनावट है screw के जैसी है तो इसका पूरा नाम हुआ screw gauge.

किसी भी object की thickness निकालने के लिए हमें किन किन चीजों की आवश्यकता होगी ?-

पहला screw gauge की जरुरत होगी। दूसरा जिस चीज की हमें thickness निकलना है और तीसरा मीटर स्केल। 

माइक्रोमीटर (screw gauge) के स्क्रू को जब clock wise घुमाया जाता है तब यह आगे की तरफ जाता है और जब इसे anti clock wise घुमाया जाता है तब यह पीछे की तरफ जाता है। micrometer में जो चुडिया बनी हुई होती है वो पास पास होती है और इन सभी के बीच का space एक बराबर होता है। इन दो चूडियो के बीच का जो ऊपरी सिरे का जो अंतराल होता है उसे हम इन दोनों के गैप को हम चूड़ी अंतराल कहते है या इसे pitch भी कहते है। 

जब हम circular  स्केल को  पूरा एक चक्कर घुमाते है (clockwise or anti clockwise ) तो यह। 0.5 mm से 1 mm आगे या पीछे की तरफ जायेगी। circular scale में 0 से 100 तक mark बने हुए होते है इसका मतलब इस circular scale पर 100  division होते  है।

आमतौर पर मिलीमीटर (mm) में मापा जाता है। एक स्क्रू गेज (screw gauge) की पिच 0.5 मिमी या 1 मिमी हो सकती है। स्क्रू गेज की पिच के according  0.5 mm या 1 mm हो सकता है  तब सर्कुलर डिवीजन की संख्या 50 डिवीजन या 100 डिवीजन हो सकती है।

जब हम circular  स्केल को  पूरा एक चक्कर घुमाते है तो जितना distance liniar scale आगे या पीछे जाती है उसे कहतें है पिच। या कह सकते है चूडियो के बीच की दूरी पिच कहलाती है। हमारे पास जो screw gauge है इसमें दो चूडियो के बीच की दुरी 1mm होती है। circular  स्केल को 100 parts में divide किया गया है।

 जब हम इसको पूरा एक चक्कर घुमाते है तब यह 1mm आगे या पीछे जाता है। इसका मतलब ये हुआ इसका least काउंट  1 mm का 100  वा हिस्सा या 1 /100  मतलब 0.01 mm  होता है।

least count =  1 /100 =  0.01 mm 

यदि इसको आधा चक्कर घुमाते है तब यह 0.5 mm आगे या पीछे जाता है। इसका मतलब ये हुआ इसका least काउंट  0.5 mm का 50   वा हिस्सा या 0.5 /50  मतलब 0.01 mm  होता है।

least count =  0.5 /50 =  0.01 mm    

Micrometer के main components :-
1- Sleeve  ( इसके ऊपर main scale होता है )
2- Lock nut (reading लेने से पहले lock nutका use किया जाता है ताकि वह हिले नहीं )
3- Spindle (यह माइक्रोमीटर में right  side में लगी हुई होती है और यह  left और right की तरफ move करता है )

4- Anvil (यह माइक्रोमीटर में left side में लगी हुई होती है और यह एक जगह fix होती है )
5- Frame (यह माइक्रोमीटर का frame होता है इस frame से सभी components जुड़े होते है )
6- Thimble (यह sleeve के साथ में जुड़ा होता है और इसमें circular scale होता है और  circular scale में  50 mm की scale होती है )
7- Ratchet stop ( यह spindle को move करने के काम आता है)

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Micrometer का least count कैसे निकाला जाता है? 
    जब thimble को आधा चक्कर घुमाया जाता है  तब spindle 0.5mm आगे जाता है। इसे हम pitch बोलते है। तब circle scale पर division की संख्या 50mm होगी । 

    Least count का formula  होता है
    Least count = pitch of the micrometer / number of division on circle scale
    Least count = 0.5/ 50 = 0.01mm यह micrometer का least count होता है। 

    जब  thimble को पूरा एक चक्कर घुमाया जाता है तब spindle 1mm आगे जाता है तब circle scale पर division की संख्या  100 mm होगी  । तब इसका Lest count 0.01 होगा। 

     Least count = 1/ 100 = 0.01mm होता है।

    कम गिनती = 0.5 / 50 या 1/100 = 0.01 mm  या 0.001 cm होगी।

    माइक्रोमीटर की reading कैसे लेते है ?- 

    Micrometer की  Reading के लिए  FORMULA होता है
    Dimensions  measured = Main scale reading +(Thimble scale reading 🗙 Least count)

    हमें Micrometer में किसी भी रीडिंग को Measure करने के लिए इसी Method का उपयोग करना पड़ेगा। 

    micrometer  kya hota hai


    यहाँ पर हम spindle और anvil के बीच एक छोटे से component को रखते है और thimble की मदद से इसे सेट करते है और lock nut की मदद से इसे lock करते हैतब हमें  main scale कि reading (5+0.5) यानी की हमारे  main reading है 5.5 mm . thimble scale की reading है 28 mm. इस reading को हम formula में सेट करेंगे। Vernier Caliper और micrometer क्या होता है  experiment  excercise observation

    Dimensions  measured  = main scale reading + (thimble scale reading 🗙 least count)

    Dimention  measured  = 5.5mm +(28mm 🗙 0.01mm)

    Dimention  measured = 5.5mm+ (0.28mm)

    Final Dimention  Reading = 5.78 MM ये हमारे component की final reading होगी।

    7 qc tools in hindi

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    7 QC tools ek quality control tool hota hai aur ye tool 95% kisi bhi problem ko short out Karne me aur use solve Karne me use Kiya jaata hai. training and pdf,ppt

    7 QC Tools Japan ke Tokio university me professor Ishikawa ne apne Team ke sath milkar 7 QC tools ko banaya hai. Hum isme data ko collect karte  hai use analysis karte hai,identify karte hai, data major karte hai aur root cause findout karte hai.

    Quality control tool 7 types ke hote hai  jinhe hum 7 qc tool ke naam se jante hai.
    SEVEN QC TOOLS in hindi
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    1. Check sheet in hindi and training 
    2. Cause and effet diagram, ishikawa diagram, fishbone diagram. in hindi
    3. Flow chart / satratification chart in hindi and ppt
    4. Histogram  in hindi
    5. Control chart   language ppt in hindi
    6. Pareto analysis in hindi pdf and training 
    7. Scatter diagram in hindi


    Six sigma (6σ)in hindi 
    • 1. Check sheet - Check sheet  in hind
    Check sheet hame count data ko collect karne  me aur organizing karne me hamari help karta hai jisse ki hum aage ki impovement activity ka use aasani se kar paaye. 

    Benefits:-
    1. Data ko collect karne me aasani hoti hai. video in hindi pdf and ppt. with examle application.
    2. Problems ke sourse ko nirdharit karta hai. new 7 quality tools and story and planning.
    3. Data ke sort  banane ke liye. difference between old and new qc tools ppt.

    -What is Quality and Quality policy in hindi
    Example of check sheet:-

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    yah ek check sheet ka example hai yaaha par defects left side me diya gaaya hai. center me par day defect right side me overall weekly defect diya gaaya hai. hum check sheet ka istemaal karte huye har din ka data collect kar sakte hai. 

    Overall defect me hame yah pata chal jaata hai ki is week me kon sa defect kitni baar aaya hai. yah check sheet hame help karta hai data ko collect karne me.
    • 2.Cause and effect diagram.(Cause and effect diagram /Fishbone diagram/Ishikawa diagram Bhi kaha jaata hai) - in hindi

    Cause and effect diagram yah ek root couse analysing ka tool hota hai isme kisibhi problem ko short out kiya jaata hai isme yah pata chal jaata hai ki  problem kis wajah se aa rahai hai. 

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    Is diagram me Right side me effect likhte hai aur inke jo causes hai unko upper aur lower side me likhte hai aur cause ko identify karne ke liye 6M ( MAN, MACHIN, MATERIAL, METHOD, MEASUREMENT, MOTHER NATURE) or 4M KA  Istemall kiya jaata hai. YA phir aap isme 4P ka bhi use kar sakte hai ( People, Process, Product, Policy procedures) inhe primary causes kaha jaata hai.

    Fishbone diagran banane ke liye Brainstorming kiya jaata hai Brainstorming karne ke baad me jo causes nikalta hai un causes ko 6M me divide kar diya jaata hai baad me phir validation karke us par root cause identify kiya jaata hai. fishwon digram bahut hi important tool hota hai hame potensial causes identify karne ke liye .



     Benefits:-
    1. Hame problem ke causes ko identify karne me madad karta hai. 
    2. Brainstorming ke relation ko bhi stablish karne me madada karta hai.
    3. Ye hame potential causes ko identify karne me madad karte hai.
    4. Ye teem work system ko laagu karta hai. 

    • 3.Flow Chart/Stratification chart - Flow Chart in hindi /Stratification chart in hindi

      ye kafi important tool hai 7 qc tool ka ye hame kisi process ke seqwens ko samjhne me help karta hai.

      Benefits:-

      1. ye hame process ke improvement ki opportunity ko identify karne me madad karta hai.
      2. process ko samajhne me help karta hai aur agar process me kuch non -value added activities hai usko bhi identify karke improve kar sakte hai.
      3. Employee aur organization ke beech working relationships ko clarify karta hai.
        Flow chart ke symbols -

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        Isse hame process ko samajhne me aasani hoti hai aur usme jo hamare defects hai hum unko identify karke us par improvements kar sakte hai.training ppt pdf hindi me dearhindi

        • 4.Histogram in hindi- 



          yah tool data collect karne ke baad me uske distribution ko samajhne ke liye kaam me laaya jaata hai.
          isko jyadatar  (SQC) Statistical Quality Controlme me bhi istemall kiya jaata hai.

          Histogram ka use karne ke liye hamare pass me daata hona chahiye jitna jyada daata hamare pass me rahega to hamara analysis aur utna behtar hoga.

          Example ke liye maan lijiye aapke pass kuch is (heating temp. image)tarah ka moulding machin ka temperature ki reading aapka emplyee la kar deta hai isko dekhne ke baad me hame kuch bhi samaj me nahi aata hai. 

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          Ab hum isko samajhne ke liye tools ka istemaal karege. 
          Tools ke istemaal se hame is data ko conclude karne me aur us par action lene me aasani ho jaati hai.

          Sabse pahle hum is data ko sumrise karte hai  ( ⇓pic no-1 ) isme hame ye pata chalta hai ki jo moulding mchin ka temp. hai wo kaha se start ho raha hai. yaha par minimum temp. 200'c hai aur maximum temp.380'c samajhne ke liye liya gaaya hai.

          Hamne 200'c se 380'c data ko 10 range me baat diya 220 to 220, 220to 240 last me 360 to 380 is tarah se isko 10 alag alag temp. me alag kar diya. isse hame yaah pata chalta hai ki kis range ke kitne data aa rahe hai jisse hame ise samajhne me aasani ho. 7qc tool ppt hindi language and pareto chart in hindi.
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          Ab iske baad  hum is sumrise  data ko  histogram  me dekhte hai. yaha  par aasani  se  hame pata chal jaata hai ki temperature ka jo range  hai wo 200'c se 380'c ke beech  me hai. yaaha par  lower  specific 200'c aur upper specific 380'c diya hai aur kitne daata point kis range me aaye hai ye bhi hame samaj me aa raha hai. 

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          yaha par hame pata chal jaata hai ki machin ka temp. lower side ki taraf jaa raha hai yaa upper side ki taraf jaa raha hai. Ab hame  yah  pata chal   jaata   hai ki hamare machin ki condition kya hai agar temp. hame jitna chahiye utna hai to achhi baat hai agar yah temperature sahi nahi hai  to hum Maction ke temperature sudharne ke liye action le sakte hai.

          5.Control chart - Control chart ih hindi

          Samay- samay par ek prakriya kaise badal jaatee hai, yah pata karane ke liyecontrol chart la istemaal kiya jaata hai.

          6. Pareto analysis ChartPareto analysis Chart in hindi

          Pareto chart data analysing tool hota hai. isme hame pata lagta hai ki hame sabse pahle kon si problem pe kaam karna hai.

          7.Scatter diagram -Scatter diagram in hindi

          Scatter diagram ka use hum do sector ke beech me jo relationship hai use findout karne ke liye use kiya jaata hai.

          इन्हे भी पढ़े -