Modi Sarkar ka 7.4% GDP Growth Claim: Kya Waqai Mazboot Hai Indian Economy?
भारत सरकार ने हाल ही में यह दावा किया है कि देश की GDP Growth Rate लगभग 7.4% रही है। यह आंकड़ा सुनने में काफ़ी प्रभावशाली लगता है और यह दर्शाता है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह ग्रोथ आम नागरिक की ज़िंदगी में भी उतनी ही मजबूती से दिखाई दे रही है? इस दावे को समझने के लिए हमें इसके अलग-अलग पहलुओं पर ध्यान देना होगा।
सबसे पहले GDP ग्रोथ का मतलब समझना ज़रूरी है। GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद, देश में एक साल के भीतर पैदा हुई वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाता है। जब GDP बढ़ती है, तो इसका मतलब होता है कि देश की आर्थिक गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं। 7.4% की ग्रोथ रेट वैश्विक स्तर पर काफ़ी अच्छी मानी जाती है, खासकर ऐसे समय में जब कई विकसित देश मंदी या कम ग्रोथ से जूझ रहे हैं।
मोदी सरकार के अनुसार इस तेज़ ग्रोथ के पीछे कई कारण हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश, जैसे हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट और डिजिटल कनेक्टिविटी, ने अर्थव्यवस्था को गति दी है। इसके अलावा मेक इन इंडिया, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम, और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा मिला है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों ने भारत को एक मज़बूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ाया है।
हालाँकि, इस ग्रोथ पर सवाल उठाने वाले विशेषज्ञ भी कम नहीं हैं। उनका कहना है कि GDP ग्रोथ के आंकड़े ज़मीनी हकीकत को पूरी तरह नहीं दिखाते। उदाहरण के तौर पर, बेरोज़गारी, महंगाई, और आय में असमानता जैसी समस्याएँ अभी भी आम लोगों को प्रभावित कर रही हैं। अगर अर्थव्यवस्था सच में इतनी मज़बूत है, तो युवाओं के लिए पर्याप्त नौकरियाँ क्यों नहीं बन पा रहीं? यह सवाल अक्सर उठाया जाता है।
ग्रामीण भारत की स्थिति भी इस बहस का अहम हिस्सा है। कृषि क्षेत्र में ग्रोथ उतनी तेज़ नहीं रही जितनी उद्योग और सर्विस सेक्टर में देखी गई है। किसानों की आय, फसल की लागत, और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे मुद्दे आज भी चुनौती बने हुए हैं। अगर GDP ग्रोथ का लाभ सिर्फ शहरी इलाकों और बड़े उद्योगों तक सीमित रह जाता है, तो इसे समावेशी विकास नहीं कहा जा सकता।
दूसरी ओर, सरकार यह तर्क देती है कि आर्थिक सुधारों का असर धीरे-धीरे नीचे तक पहुँचता है। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से रोज़गार के अवसर पैदा हो रहे हैं और भारत में विदेशी निवेश बढ़ा है। इसके साथ ही, स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल पेमेंट्स में भारत ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। ये संकेत बताते हैं कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद पहले से ज़्यादा मज़बूत हुई है।
महंगाई का मुद्दा भी इस चर्चा में अहम है। भले ही GDP ग्रोथ अच्छी हो, लेकिन अगर रोज़मर्रा की चीज़ें महंगी होती जाएँ, तो आम आदमी को इसका फायदा कम महसूस होता है। सरकार ने महंगाई को कंट्रोल में रखने के लिए कई कदम उठाने की बात कही है, लेकिन खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतें अक्सर चिंता का कारण बनती हैं।
अंत में कहा जा सकता है कि 7.4% GDP Growth का दावा आंकड़ों के लिहाज़ से मज़बूत दिखता है, और भारत की अर्थव्यवस्था वाकई कई मोर्चों पर आगे बढ़ी है। लेकिन यह ग्रोथ तब ही पूरी तरह सार्थक मानी जाएगी, जब इसका फायदा रोज़गार, आय और जीवन स्तर में सुधार के रूप में आम लोगों तक पहुँचे। भारतीय अर्थव्यवस्था मज़बूती की राह पर है, लेकिन अभी उसे पूरी तरह मज़बूत कहने से पहले ज़मीनी हकीकत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।


No comments:
Post a Comment