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13 January, 2026

Nifty 50 Support Se Bounce: Kya Ab Call Side Me Banega Strong Upmove? Analysis

 

Nifty 50 Support Se Bounce: Kya Ab Call Side Me Banega Strong Upmove?

13 जनवरी 2026 को Nifty 50 मजबूत सपोर्ट पर टिकता दिख रहा है। यहां से कॉल साइड में सीमित रिस्क के साथ ऊपर की ओर मूव की संभावना बनी हुई है।


NIFTY 50 मार्केट अपने मजबूत सपोर्ट ज़ोन पर आ चुका है और वहीं से रिएक्शन देकर ऊपर की तरफ़ मूव करने की कोशिश कर रहा है। 4 घंटे के टाइमफ्रेम में देखने पर यह एक रेंज-बाउंड से रिवर्सल का संकेत देता हुआ स्ट्रक्चर बनाता नज़र आ रहा है। पहले मार्केट ने ऊपरी रेजिस्टेंस ज़ोन के पास अस्वीकृति (rejection) दिखाई, उसके बाद तेज़ गिरावट आई, लेकिन गिरावट के दौरान जैसे ही प्राइस ने सपोर्ट ज़ोन को छुआ, वहाँ से खरीदारी का दबाव (buying interest) देखने को मिला। यही कारण है कि वहाँ से एक हरी कैंडल बनी और प्राइस वापस ऊपर की ओर मूव करने लगा।


यह सपोर्ट ज़ोन पहले भी कई बार काम कर चुका है, इसलिए इसे डिमांड एरिया माना जा सकता है। जब कोई लेवल बार-बार प्राइस को नीचे जाने से रोकता है, तो वहाँ बड़े प्लेयर्स की एंट्री होने की संभावना बढ़ जाती है। इस चार्ट में भी यही स्थिति दिखाई दे रही है। नीचे की तरफ़ एक लॉन्ग विक (long wick) यह दर्शाती है कि नीचे के भावों पर बिकवाली टिक नहीं पाई और खरीदारों ने कंट्रोल लेना शुरू कर दिया। यह टेक्निकली एक बुलिश संकेत माना जाता है।


इसके अलावा, ट्रेंडलाइन स्ट्रक्चर को देखें तो मार्केट एक बड़े अप-स्लोपिंग चैनल के अंदर मूव कर रहा है। हाल की गिरावट उसी चैनल के निचले हिस्से के पास आकर रुकी है। जब भी प्राइस ट्रेंडलाइन सपोर्ट के पास आता है और वहाँ से स्टेबल होता है, तो आमतौर पर ऊपर की तरफ़ रिट्रेसमेंट या अगली अप-मूव देखने को मिलती है। इसका मतलब यह है कि ओवरऑल ट्रेंड अभी भी पूरी तरह से नेगेटिव नहीं हुआ है, बल्कि यह एक हेल्दी करेक्शन जैसा दिखाई देता है।


वॉल्यूम के व्यवहार पर ध्यान दें तो सपोर्ट के पास वॉल्यूम में सुधार दिखता है, जो यह संकेत देता है कि यहाँ एक्टिव पार्टिसिपेशन हो रहा है। अगर यह सिर्फ़ कमजोर रिबाउंड होता, तो वॉल्यूम बहुत कम रहता। लेकिन वॉल्यूम का सपोर्ट के पास बढ़ना यह दर्शाता है कि मार्केट इस लेवल को सम्मान दे रहा है। जब सपोर्ट होल्ड होता है और वॉल्यूम साथ देता है, तो ऊपर की तरफ़ मूव की संभावना और मजबूत हो जाती है।


इस परिस्थिति में, जब तक यह सपोर्ट ज़ोन सुरक्षित है, तब तक ऊपर की साइड का बायस बना रह सकता है। इसलिए शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए कॉल साइड की पोज़िशन पर फोकस करना लॉजिकली सही लगता है। हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि मार्केट सीधे एकतरफ़ा नहीं चलता। बीच-बीच में छोटे पुलबैक या कंसोलिडेशन आ सकते हैं। लेकिन अगर प्राइस सपोर्ट के ऊपर टिके रहने में सफल रहता है और धीरे-धीरे हाईअर लो बनाता है, तो यह एक सस्टेनेबल अप-मूव का संकेत होगा।


निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि फिलहाल मार्केट ने अपना महत्वपूर्ण सपोर्ट ज़ोन पकड़ रखा है और वहाँ से रिवर्सल के संकेत मिल रहे हैं। टेक्निकल स्ट्रक्चर, प्राइस एक्शन और सपोर्ट-रेजिस्टेंस के आधार पर यह माना जा सकता है कि ऊपर की तरफ़ मूवमेंट की संभावना अधिक है, और इसी सोच के साथ कॉल साइड की रणनीति बनाई जा सकती है, बशर्ते रिस्क मैनेजमेंट का पूरा ध्यान रखा जाए।

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