शेयर बाजार कैसे काम करता है, यह समझना हर उस व्यक्ति के लिए ज़रूरी है जो निवेश (Investment) करना चाहता है या पैसों को समझदारी से बढ़ाने की सोच रखता है। शेयर बाजार को आम भाषा में समझें तो यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ कंपनियाँ और निवेशक आपस में मिलते हैं। कंपनियाँ अपने बिज़नेस को बढ़ाने के लिए आम जनता से पैसा जुटाती हैं और बदले में उन्हें कंपनी में हिस्सेदारी यानी शेयर देती हैं। निवेशक इन शेयरों को खरीदकर कंपनी के मुनाफे और ग्रोथ का हिस्सा बन जाते हैं।
जब कोई कंपनी पहली बार शेयर बाजार में आती है, तो उसे IPO (Initial Public Offering) कहा जाता है। IPO के ज़रिए कंपनी अपने शेयर आम लोगों को बेचती है और जो पैसा मिलता है, उसे बिज़नेस के विस्तार, कर्ज चुकाने या नए प्रोजेक्ट्स में लगाया जाता है। IPO के बाद वही शेयर शेयर बाजार में ट्रेड होने लगते हैं, यानी लोग उन्हें खरीद और बेच सकते हैं। भारत में मुख्य रूप से दो बड़े शेयर बाजार हैं – NSE (National Stock Exchange) और BSE (Bombay Stock Exchange)। यहीं पर रोज़ाना लाखों शेयरों की खरीद-बिक्री होती है।
शेयर बाजार में निवेश करने के लिए सबसे पहले Demat Account और Trading Account की ज़रूरत होती है। Demat Account में आपके खरीदे गए शेयर डिजिटल रूप में सुरक्षित रहते हैं, जबकि Trading Account के ज़रिए आप शेयर खरीदने और बेचने का ऑर्डर देते हैं। यह अकाउंट किसी स्टॉक ब्रोकर या बैंक के माध्यम से खोला जाता है। आजकल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के कारण अकाउंट खोलना और ट्रेड करना काफी आसान हो गया है।
शेयर की कीमत कैसे तय होती है, यह समझना भी बहुत ज़रूरी है। शेयर की कीमत demand और supply पर निर्भर करती है। अगर किसी कंपनी के शेयर खरीदने वाले ज़्यादा हैं और बेचने वाले कम, तो शेयर का भाव बढ़ता है। वहीं अगर बेचने वाले ज़्यादा हो जाते हैं, तो कीमत गिर जाती है। इसके अलावा कंपनी का मुनाफा, भविष्य की योजनाएँ, मैनेजमेंट की क्वालिटी, देश और दुनिया की आर्थिक स्थिति, ब्याज दरें और सरकार की नीतियाँ भी शेयर की कीमत को प्रभावित करती हैं।
शेयर बाजार में दो तरह के निवेशक होते हैं – Trader और Investor। Trader आमतौर पर कम समय के लिए शेयर खरीदते और बेचते हैं, जैसे Intraday या Short Term Trading। उनका मकसद छोटे उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाना होता है। दूसरी ओर Investor लंबे समय के लिए निवेश करते हैं। वे मजबूत कंपनियों के शेयर खरीदकर सालों तक होल्ड करते हैं ताकि कंपनी की ग्रोथ और डिविडेंड से फायदा मिल सके। आम लोगों के लिए निवेश का तरीका ट्रेडिंग से ज़्यादा सुरक्षित माना जाता है।
शेयर बाजार का संचालन पूरी तरह नियमों और कानूनों के तहत होता है। भारत में शेयर बाजार को नियंत्रित करने वाली संस्था SEBI (Securities and Exchange Board of India) है। SEBI का काम निवेशकों के हितों की रक्षा करना, धोखाधड़ी को रोकना और बाजार में पारदर्शिता बनाए रखना है। इसी वजह से शेयर बाजार में निवेश पहले के मुकाबले आज ज़्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित हो गया है।
जब आप शेयर खरीदते या बेचते हैं, तो यह प्रक्रिया पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक होती है। आपने ट्रेडिंग ऐप या वेबसाइट पर ऑर्डर डाला, वह ऑर्डर एक्सचेंज तक पहुँचता है और वहाँ matching के बाद सौदा पूरा हो जाता है। इसके बाद Clearing और Settlement की प्रक्रिया होती है, जिसमें खरीदार को शेयर मिलते हैं और बेचने वाले को पैसा। भारत में यह प्रक्रिया T+1 या T+2 सेटलमेंट सिस्टम के तहत होती है, यानी तय समय के भीतर ट्रांजैक्शन पूरा हो जाता है।
शेयर बाजार में जोखिम (Risk) भी होता है, क्योंकि यहाँ कोई भी मुनाफा गारंटी के साथ नहीं मिलता। शेयर की कीमतें कभी भी ऊपर-नीचे हो सकती हैं। इसलिए निवेश करने से पहले सही जानकारी, रिसर्च और धैर्य बहुत ज़रूरी है। बिना समझे, अफवाहों या टिप्स के भरोसे निवेश करना नुकसानदायक हो सकता है। हमेशा अपनी वित्तीय स्थिति और लक्ष्य के अनुसार ही निवेश करना चाहिए।
अंत में कहा जा सकता है कि शेयर बाजार पैसे कमाने का जादुई तरीका नहीं, बल्कि एक अनुशासित और समझदारी भरा निवेश प्लेटफॉर्म है। अगर सही ज्ञान, लंबी सोच और धैर्य के साथ निवेश किया जाए, तो शेयर बाजार लंबे समय में संपत्ति बनाने का एक बेहतरीन साधन बन सकता है। नए निवेशकों के लिए ज़रूरी है कि वे पहले सीखें, छोटे निवेश से शुरुआत करें और धीरे-धीरे अनुभव के साथ आगे बढ़ें।


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