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27 January, 2026

Bonus Share aur Split Share kya hota hai? Poori Jankari

 

Bonus Share aur Split Share kya hota hai? Poori Jankari

📈 शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए बोनस शेयर और स्प्लिट शेयर बहुत ही महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट एक्शन होते हैं। जब कोई कंपनी अपने शेयरधारकों को अतिरिक्त लाभ देना चाहती है या अपने शेयर को आम निवेशकों के लिए अधिक सुलभ बनाना चाहती है, तब वह बोनस या स्प्लिट की घोषणा करती है। इन दोनों का असर शेयर की संख्या और कीमत पर पड़ता है, लेकिन निवेशक की कुल वैल्यू पर नहीं।


🎁 बोनस शेयर क्या होते हैं? बोनस शेयर वे अतिरिक्त शेयर होते हैं जो कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को मुफ्त में देती है। यह शेयर कंपनी अपने रिज़र्व और मुनाफे से जारी करती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक के पास 100 शेयर हैं और कंपनी 1:1 बोनस घोषित करती है, तो निवेशक को 100 अतिरिक्त शेयर मिलेंगे और कुल शेयर 200 हो जाएंगे।


💰 बोनस शेयर देने का मुख्य उद्देश्य निवेशकों को कंपनी के साथ लंबे समय तक जोड़े रखना और शेयर की लिक्विडिटी बढ़ाना होता है। बोनस जारी होने के बाद शेयर की कीमत अपने आप कम हो जाती है, लेकिन निवेशक की कुल निवेश वैल्यू वही रहती है। इससे नए निवेशकों को भी शेयर खरीदने का अवसर मिलता है।


📊 बोनस शेयर के फायदे बोनस शेयर मिलने से निवेशक के पास शेयरों की संख्या बढ़ जाती है। भविष्य में यदि कंपनी अच्छा प्रदर्शन करती है और शेयर की कीमत बढ़ती है, तो निवेशक को अधिक लाभ हो सकता है। इसके अलावा, बोनस से यह संकेत भी मिलता है कि कंपनी आर्थिक रूप से मजबूत है और उसके पास पर्याप्त रिज़र्व हैं।


⚠️ बोनस शेयर के नुकसान बोनस शेयर मिलने से तुरंत कोई नकद लाभ नहीं होता। यदि कंपनी भविष्य में अच्छा प्रदर्शन नहीं करती, तो शेयर की कीमत में गिरावट भी आ सकती है। इसलिए केवल बोनस की खबर पर निवेश करना समझदारी नहीं होती, कंपनी की वित्तीय स्थिति को समझना जरूरी होता है।


🔁 स्प्लिट शेयर क्या होते हैं? स्प्लिट शेयर का मतलब होता है एक शेयर को कई छोटे हिस्सों में बांटना। उदाहरण के लिए, यदि किसी शेयर की कीमत 1000 रुपये है और कंपनी 1:5 स्प्लिट करती है, तो शेयर की कीमत 200 रुपये हो जाएगी और निवेशक के शेयरों की संख्या पांच गुना बढ़ जाएगी।


📉 स्प्लिट का मुख्य उद्देश्य शेयर की कीमत को कम करके उसे आम निवेशकों के लिए सस्ता और सुलभ बनाना होता है। जब शेयर की कीमत बहुत ज्यादा हो जाती है, तब छोटे निवेशक उसमें निवेश नहीं कर पाते। स्प्लिट से ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ता है और बाजार में शेयर की मांग बढ़ती है।


📈 स्प्लिट शेयर के फायदे स्प्लिट के बाद शेयर की कीमत कम हो जाती है, जिससे ज्यादा निवेशक उसमें निवेश कर पाते हैं। इससे शेयर में लिक्विडिटी बढ़ती है और ट्रेडिंग आसान हो जाती है। लंबे समय में यदि कंपनी अच्छा प्रदर्शन करती है, तो स्प्लिट के बाद खरीदे गए शेयर अधिक लाभ दे सकते हैं।


⚠️ स्प्लिट शेयर के नुकसान स्प्लिट से कंपनी की कुल मार्केट वैल्यू में कोई बदलाव नहीं होता। केवल शेयर की संख्या और कीमत बदलती है। यदि निवेशक केवल सस्ते दाम देखकर निवेश करता है और कंपनी के फंडामेंटल्स को नजरअंदाज करता है, तो नुकसान हो सकता है।


🧠 बोनस और स्प्लिट में मुख्य अंतर बोनस शेयर में निवेशक को मुफ्त में अतिरिक्त शेयर मिलते हैं, जबकि स्प्लिट में पुराने शेयर छोटे हिस्सों में बंट जाते हैं। बोनस कंपनी के रिज़र्व से दिया जाता है, जबकि स्प्लिट केवल शेयर की फेस वैल्यू को बदलता है। दोनों ही स्थितियों में निवेशक की कुल निवेश वैल्यू समान रहती है।


निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए? बोनस या स्प्लिट की घोषणा सुनकर तुरंत निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए। कंपनी की आय, मुनाफा, कर्ज और भविष्य की योजनाओं का विश्लेषण करना जरूरी होता है। यदि कंपनी मजबूत है, तो बोनस और स्प्लिट लंबे समय में निवेशक के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।


📌 निष्कर्ष बोनस शेयर और स्प्लिट शेयर दोनों ही निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माने जाते हैं, लेकिन यह अपने आप में लाभ की गारंटी नहीं होते। समझदारी भरा निवेश वही होता है जो सही जानकारी, धैर्य और कंपनी के मूल आधार पर किया जाए। तभी शेयर बाजार से स्थायी और सुरक्षित लाभ प्राप्त किया जा सकता है। 🌟

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