आज भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। Sensex और Nifty लगातार पांचवें दिन दबाव में रहे, जिससे यह साफ हो गया कि यह गिरावट सिर्फ एक दिन की नहीं बल्कि व्यापक कारणों से जुड़ी हुई है। आज की गिरावट का मुख्य कारण global trade tension, अमेरिका की ओर से संभावित नए tariffs का डर, और Foreign Institutional Investors (FIIs) की भारी बिकवाली रही। इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर बाजार के sentiment को कमजोर बना दिया और निवेशक risk लेने से बचते नजर आए।
आज के कारोबारी सत्र में Sensex करीब 605 अंकों की गिरावट के साथ 83,576 के आसपास बंद हुआ, जबकि Nifty 50 लगभग 194 अंक टूटकर 25,683 पर बंद हुआ। प्रतिशत के लिहाज से दोनों प्रमुख इंडेक्स करीब 0.7–0.8% नीचे रहे। यह गिरावट इसलिए ज्यादा अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले पांच trading sessions से बाजार लगातार गिर रहा है। लगातार दबाव के चलते short-term traders और retail investors दोनों में घबराहट दिखी, जिसका असर पूरे बाजार की breadth पर पड़ा।
अमेरिका से जुड़ी trade uncertainty इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। US President Donald Trump की ओर से यह संकेत मिले हैं कि भारत समेत कुछ देशों के exports पर tariffs बढ़ाए जा सकते हैं। खासतौर पर oil imports और trade policy को लेकर सख्त रुख अपनाने की आशंका ने “Trump trade” को फिर से चर्चा में ला दिया है। निवेशकों को डर है कि अगर US–India trade relations में तनाव बढ़ता है, तो IT, pharma, auto components और अन्य export-oriented sectors पर सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा। इसके अलावा, US Supreme Court में tariffs से जुड़ी powers पर चल रही legal hearing ने भी global markets में uncertainty बढ़ा दी है।
आज की गिरावट में Foreign Institutional Investors (FIIs) की भूमिका सबसे अहम रही। FIIs पिछले कुछ महीनों से भारतीय शेयर बाजार में लगातार net sellers बने हुए हैं। जनवरी की शुरुआत में ही उन्होंने cash market से 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर दी है। आज भी FIIs की heavy selling ने large-cap stocks को जोरदार दबाव में डाल दिया, क्योंकि इन शेयरों में उनकी हिस्सेदारी ज्यादा होती है। हालांकि Domestic Institutional Investors (DIIs) ने कुछ हद तक buying कर support देने की कोशिश की, लेकिन वे FIIs के भारी outflow को पूरी तरह balance नहीं कर पाए।
Global cues भी आज बाजार के खिलाफ रहे। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली क्योंकि निवेशक US jobs data, tariffs पर Supreme Court के फैसले और global trade growth के outlook का इंतजार कर रहे हैं। इस uncertainty के चलते निवेशकों ने risky assets से पैसा निकालकर safe-haven assets जैसे US dollar और bonds की ओर रुख किया। Emerging markets, जिनमें भारत भी शामिल है, इस risk-off sentiment से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। इसके साथ ही short-term traders ने leveraged positions cut कीं, जिससे intraday volatility और तेज हो गई।
Sectoral performance की बात करें तो आज ज्यादातर सेक्टर्स लाल निशान में बंद हुए। Auto, FMCG, realty, consumer durables, financials और power जैसे सेक्टर्स में 1–2% तक की गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर realty और small-cap stocks सबसे ज्यादा दबाव में रहे। Nifty Realty index करीब 2.3% गिरा, जबकि Nifty Smallcap 100 लगभग 1.8% टूट गया। कुछ चुनिंदा stocks जैसे Oil & Gas सेक्टर के शेयर, ONGC और Asian Paints ने थोड़ी मजबूती दिखाई, लेकिन overall market breadth इतनी कमजोर रही कि ये सपोर्ट नाकाफी साबित हुआ।
Technical नजरिए से भी बाजार की स्थिति फिलहाल कमजोर बनी हुई है। Nifty ने daily chart पर एक और bearish candle बनाई और 25,760 के ऊपर sustain नहीं कर पाया। अब immediate support zone 25,620–25,500 के आसपास माना जा रहा है। Bank Nifty भी कमजोर structure में दिखा और 59,250 के करीब बंद हुआ, जो banking और financial stocks में ongoing selling का संकेत देता है। पिछले पांच दिनों में Sensex 2,100 अंकों से ज्यादा टूट चुका है, जिससे market short-term में oversold जरूर लग रहा है, लेकिन जब तक global uncertainty clear नहीं होती, तब तक strong pullback की संभावना सीमित मानी जा रही है।
निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने का संकेत देता है। Short-term traders के लिए यह high-volatility phase है, जहां बिना stop-loss aggressive ट्रेडिंग करना जोखिम भरा हो सकता है, खासकर F&O segment में। वहीं long-term investors के लिए विशेषज्ञ इस गिरावट को quality stocks में phased buying opportunity के तौर पर देख रहे हैं। खासतौर पर financials, consumer और industrial stocks में valuations थोड़ी attractive हो रही हैं। आने वाले दिनों में Q3 results season, global tariff verdict और FII flows यह तय करेंगे कि यह गिरावट सिर्फ एक short-term correction है या बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। इसलिए disciplined और balanced investment approach इस समय सबसे बेहतर रणनीति मानी जा रही है।


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