8D problem solving techniques in hindi

8D problem solving techniques in hindi

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Ford कंपनी ने 1980 में एक problem solving process को start किया था उसे 8D या Eight Discipline के नाम से जाना जाता है। 8D का प्रयोग करने के बाद यह इतना effective (प्रभावी)साबित हुआ की इसे ford कंपनी द्वारा इसे primary document  बानाया गया और ford company आज भी 8D problem solving techniques का उपयोग करती आ रही है।

इसके द्वारा हम problem के कारणों को ख़तम करके quality को continusly improve कर सकते है। यह problem को solve करने में help करता है। इस 8D से हम future में आने वाली या present में आ रही problem को solve कर सकते है। 

हमें 8D का प्रयोग कब करना चाहिए - जब यह स्पष्ट हो जाता है की हमारे product में defect है और यह हमारे customer को satisfy नहीं कर रहा है तब हम quality को सुधारने के लिए  8D problem solving techniques का प्रोयोग करते है। 
  • 8 Discipline कौन कौन से है -

D1- Define The problem
Problem को define करना
D2- Build a Team 
Team तैयार करना
D3- Containment Action
Action लेना इसे Interim Containment Action (ICA)
D4- Determine the root cause
Root cause को determaine करना
D5- Verify the root cause 
 Root cause को verify करना
D6-Permanent Corrective Action
Permanent Corrective Action (PCA)लेना 
D7- Prevention
रोकना या निवारण करना
D8-Congratulate the team 
टीम को congratulate करना

D1- Define The problem
क्या हम जानते है actual में problem क्या है। और क्या इससे पहले भी हमने ऐसे problem को face किया है। problem से related हमारे पास क्या क्या evidence है। 

D2- Build a Team
एक बार हमें problem का पता चल गया तो हमें एक team जरूर बनानी चाहिए जो उस problem को पकड़ सके। और यह उन लोगो की team होनी चाहिए जिसको इस problem से related skil और knowledge हो।

D3- Containment Action
तुरंत कोई action लेना चाहिए जिससे काम को start किया जा सकेऔर क्या हमारे पास stock ज्यादा qty में है ताकि हमारे production पर कोई effect न पड़े। हमें ध्यान के रखना होगा हम जो भी manufacture कर रहे है उसमे same problem तो नहीं आ रही है या फिर हमने जो action लिया है प्रॉब्लम solve करने के लिए उससे कुछ दूसरी समस्या तो नहीं generate हो रही है। 

D4- Determine the root cause
क्या हमने problem के कारण को खोज लिया है और इस problem के एक कारण है या एक से ज्यादा। 

D5- Verify the root cause
क्या हम sure है हमने जो root cause खोजा है उस problem का real कारण वही है। 

D6- Corrective Action
जो हमने parmanent एक्शन लिया है उसके बारे में हमने सब को बता दिया है  और root cause को review करना और fmea में update करना और हमने जो temprery action लिया गया था उसे remove करना। 

D7- Prevention
हमने सभी action ले लिए है उस problem को रोकने के लिए ताकी वही problem दोबारा न आये हमने problem को same product और process से consider किया है। 

D8-Congratulate the team
टीम को feedback देना हर एक team member को problem में दिए गए योगदान के बारे में identify करवाना और problem solve करने के लिए team member के प्रयासों को सराहना  करना और Successful होने के बाद में team  साथ Celebrate करना। 

Bits and Bytes kya hota hai

Bits and Bytes kya hota hai -

आजकल हम सभी internet use करते है और ऐसे में mega bytes mega bits और giga bits और giga bytes और तरह तरह के नामो को सुनते है और साथ ही  साथ  बहुत बार confuse हो जाते है bits और bytes के बारे  में। dearhindi.com me aapka swagat hai.
bits,bytes,kilobytes,mb,kb


हमारे mobile और computer की भाषा binary में होती है binary का मतलब 0 और 1 (0,1) अगर हम अपने computer में zero की बटन  press करते है तो हमें सामने स्क्रीन पर zero (0) दिखाई देता है लेकिन computer is भाषा को नहीं समझता है वह इसे अपने language (binary)में convert कर देता है जैसे हमने 0 की बटन को दबाया तब वह (0000) में convert कर देता है इसी तरह जब हम 1 की बटन को press करते है तब वह 0001  में convert कर देता है computer और mobile binary की भाषा को समझता है। जैसे dearhindi

0 = 0000
1 =0001
2 =0010
3 =0100

हम लोग mobile और laptop में जो फोटो गाने चाहे वह mp3 हो या mp4 वे सब इसी तरह से binary में बदलकर 0 और 1 में convert  करता है। 0 और 1 (0,1)को हम  bit बोलते  है।  अगर यह शंख्या चार हो जाय तब हम इसे nibble बोलते है और जब यह शंख्या 8 हो जाती है तब  हम इसे byte बोलते है। 

(0,1) = binary (1 b) Bits and Bytes kya hota ha
(0000)= nibble (1n)
(00010010)=byte (1byte)

Bit क्या होता है :- bit मतलब small unit of data, small unit of storage जो भी हम काम में लेते है computers में और यहाँ पर केवल इसके केवल दो stage होते है on or off (0 or 1 ) basically यहाँ पर केवल दो value हो सकती है पहली है 0 (zero) और दूसरी है 1 (one) 

लेकिन इन दो से हमारा क्या होगा हमे यहाँ पर store करना होता है तरह तरह के charectors और symboles तो हमको यहाँ पर  ऐसा नहीं है की अगर मानलीजिए हमें एक गाना store करना है या फिर हमें एक फोटो store करनी है तो ऐसे हे हमारा डाटा कितना सारा होगा गाने के एक एक second में और फोटो के एक एक pixal में अगर आपको कुछ number letter भी type करना है तो  हमने एक एक letter के लिए और हर एक charecter के लिए हमने कितने सरे bit का use किया है क्यों की दो से हमारा काम चलने वाला नहीं है तो ऐसे में हने जरुरत पड़ी एसी unit की जिसे हम bits के बाद में काम में ले पाए जैसे byte इसके बाद में kilobyte,Mega Byte इसी तरह से यह बढता जाता है TB,PB,EB -  - यहाँ पर 1 byte बराबर होता है 8 bits के। मतलब 8 bits का एक group बन जात है (10010001) जिसे हम कहते है 1 byte (10010001=1 byte ) इसी तरह से यह बढता जाता है। 

1 byte बराबर होता है = 8 bits 

इसी तरह
1(KB) Kilo Byte    =1024 byte
1(MB) Mega Byte = 1024KB (एक mb में 1024 kb होता है)
1(GB) Giga Byte   =1024MB
1(TB) Tera Byte    =1024GB
1 (PB)Peta Byte    =1024TB
1(EB) Exa Byte    =1024PB
1(ZB) ZettaByte   =1024EB
1 (YB)yotta Byte  =1024ZB   Bits and Bytes kya hota ha


यहाँ पर एक main confusion तब आता है जब हम देखते है अपने internet की speed जो की देता  है 5 Mbps तब हमें लगता है  5 mega byte पर second  लेकिन यहाँ पर आप जो समझते है MBps (mega byte ps) नहीं होता है वो होता है Mbps (mega bit ps) यहाँ पर  difference आपको देखने को मिलेगा जो की है small और capital letter का। अगर capital letter में लिखा है MB इसका मतलब होता है mega byte और अगर M-capital और b- small लिखा है तो इसका मतलब होता है Mbps, mega bit par second. 

अगर आप देखते है अपने internet की speed को और सोचते है की 5 Mbps की speed है पर second मतलब 50 MB का video 10 second में downlode हो जायेगा लेकिन एसा होता नहीं है क्योकि आपके internet की जो speed है वो है mega bit में जो आप downloding करने वाले है वो है MB (mega byte) में। 

यहाँ पर आपके internet की speed जो मिलती है वो होती है Mega bit, Giga bit ,Kilo bits और जो आपके पास mp3 या mp4 के songs होते है वो होते है Mega Byte ,kilo Byte, Giga Byte में।



vivo v11 pro price in india and specifucations

vivo v11 pro price and specifucations with in display fingerprint sensor launched in india price specifications.

Features of Vivo V11 Pro have been given a super-embellished display of 6.4 inches. This phone works on Qualcomm Snapdragon 660 processor. Apart from this, this phone has been launched in the market with 6 GB of RAM and 64 GB of memory. Memory of the phone can also be extended to 256 GB via micro SD card.

The camera of this phone will get dual camera setup in it. These cameras will be of 12 megapixels and five megapixels. Apart from this, the phone is given a 25-megapixel front camera for selfie lovers.

Vivo has launched its new smartphone V11 Pro in India. Vivo V11 Pro was launched on an event held in Mumbai on Thursday. In Chinese company Vivo's new phone, the in-display fingerprint sensor has been given. Earlier, the company has also launched Vieu Nex and  Vivo X23 in the country.
Both of these phones also come with in-display fingerprint sensor. The company informed in the launch event that due to the success of Vivo V9, the company captured 60 per cent market share of the segments between Rs 20,000 and Rs 25,000. In VivoV11 Pro, features like 91.27 percent screen-to-body ratio and 3D curved back design have been given.

Vivo V11 Pro Price

The cost of the VivoV11 Pro is Rs 25,990 in the country. Registration for the phone has started from Thursday, while the sale will begin on September 12. The phone will be available online for sale and offline retail partners. Under the launch offer with the smartphone, a cashback of Rs 2,000 will be paid on payment through HDFC Bank Credit / Debit Card. Geo Users are being offered a 4,050 cashback and one-time free screen replacement warranty. Phone Dazzling Gold and Stary Night in Black Color.


Vivo V11 Pro specifications-

This phone of Vivo has a 6.41 inch FullHD + (1080x2340 pixels) Hello Fullview 3.0 super amoled display with an aspect ratio of 19.5: 9. The Octa-Core Qualcomm Snapdragon 660 AEE processor has been given in VivoV11 Pro. The phone has an option of 6 GB RAM. Storage is 64 GB, which can be increased to 256 GB via microSD card. Phone Dual Sim Supports The phone runs on the Android 8.1 OSO based Function OS 4.5.

To give the power to the smartphone, a 3400 mAh battery is provided, which comes with the dual engine fast charging. For connectivity, 4G VOLTE, Dual-Band, Wi-Fi, Bluetooth 4.2, GPS / A-GPS, Micro-USB and 3.5mm audio jacks are provided in the smartphone. The phone has features such as accelerometer, ambient light sensor, electronic compass, gyroscope. Dimensions of Vivo V11 Pro are 157.91x75.08x7.9 millimeters and weighing 156 grams.

The smartphone has two rear cameras for fatgraphy. The handset has dual LED flash, with dual pixel technology, 12 megapixels (aperture F / 1.8) primary and 5 megapixels (aperture F / 2.4) secondary sensor. The Vievo's smartphone for Selpi has been given a 25-megapixel sensor with aperture F / 2.0. The FunMojis feature is available in the camera so that users can share personalized animated avatar with their friends. Game mode 4.0 is available for the best gaming experience in the phone.

Nokia 6.1 plus smart phone review performance and specifications

Nokia 6.1 plus smart phone review performance and specifications


Last month, HMD Global had launched two new smartphones Nokia 6.1 Plus and Nokia 5.1 Plus in the country. The Nokia 6.1 Plus smartphone will be made available for sale for a second time today. The phone can be bought from the e-commerce site Flipkart and online shop Nokia. A flash cell will be held for the handset at 12 o'clock in the afternoon. Nokia's mid-range phone has features such as display noch and two rear cameras.

Specifications of Nokia 6.1 Plus -  


Nokia 6.1 Plus comes with Dual SIM touch and runs on Android 8.1 Oreo. Nokia 6.1 Plus has 3060 mAh battery, with an 18-watt charger. The company claims that the phone's battery is charged up to 50 percent in 30 minutes and Quick Charge 3.0 technology is done. Smartphone has a dual rear camera setup with aperture F / 2.0 16 megapixel primary and 5 megapixel monochrome sensor. Nokia 6.1 Plus has a 16 megapixel front camera with selfie F / 2.0 for selfie and video calling.

All the specifications in the Nokia 6.1 Plus are Nokia X6. It has a 5.8 inch Full HD + (1080x2280 pixels) display, which is equipped with 2.5 de Gorilla Glass 3. A knock on the display is given and the aspect ratio of the screen is 19: 9. The phone has an octa-core Snapdragon 636 processor and 4 GB RAM. This Nokia smartphone has Nokia 6.1 Plus 64 GB inbuilt storage which can be expanded up to 400 GB via microSD card.


For connectivity Nokia 6.1 Plus has features such as 4G VoLTE, Wi-Fi 802.11 AC, Bluetooth 5.0, GPS / A-GPS, 3.5mm audio jack and USB Type-C port. Accelerometer, ambient light sensor, digital compass, gyroscope and proximity sensors have been provided in the Nokia 6.1 Plus. The dimensions of the phone are 147.2x70.98x7.99 millimeters and weighing 151 grams.

This is the specialty of this smartphone-

FEATURES ➽ Nokia 6.1 Plus
Front camera➽  16 megapixels
Rear camera➽  16+ 5 megapixels
Battery ➽ 3060mAh
OS ➽ Android 8.1
Connectivity ➽4G VoLTE, Wi-Fi, Bluetooth
Display ➽ 5.8 inch Full HD +
Processor➽  snapdragon 636
RAM ➽ 4 GB
Storage ➽ 64 gb

Sale from August 30 -  


Pre-booking of Nokia 6.1 Plus has begun on Flipkart and since August 30, it will be sold at Flipkart and Nokia's online store. Sales of Nokia 5.1 Plus will start from September. Both of these smartphones are launched under Google's Android One program, which means it will get the experience of Google's stock Android. Along with this it will also get Android pie update. If you are also planning to buy Nokia's new smartphone, then read the review of Nokia 6.1 Plus before that.

What is 5s? 5s kya hota hai

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5s का अर्थ क्या है ?
5s एक जापानी विचारधारा (technic) है - जिसके अंतर्गत Management तथा Employee के सहयोग द्वारा अपने कार्यस्थल,मशीन,उपकरण आदि के अच्छे रख-रखाव एवं सुरक्षित रहकर कार्य करना 5s कहलाता है। मुख्यतः  5s  workstation  में व्यवस्था  स्थापित करने तथा व्यवस्थित रख रखाव के लिए एक विचारशील मार्ग स्थापित करना है।  इसे क्रमशः 5 चरणों में प्राप्त किया जा सकता है।  counting in hindi 

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5s के 5 steps इस प्रकार है।   counting in hindi 


japani language में - seire,  seiton,  seiso,  seikets,  shitsuke
English language में - 
1s - sort in hindi posters and training pdf and ppt.
2s - set in order 
3s - shine  housekeeping ppt in hindi formate.
4s - standardize meening and posters free download full form
5s - sustain
    हिंदी language में -
    1s- छंटाई 
    2s- यथास्थान (व्यवस्थित रख रखाव ) 
    3s- सफाई 
    4s- सही मानकीकरण  
    5s- स्व-अनुशासन 
    Short- जो भी काम का है उसे अपने पास रखे बाकी सब हटा दे।
    Set in order- सभी चीजों की जगह और सभी चीज अपनी जगह पर होनी चाहिए।
    Shine- उस क्षेत्र की सफाई जहां आप जरुरत की चीजे रखते हैं।
    Standardize- नियमों का पालन करें और उन्हें लागू करें उस जगह का क्या नाम है उसे एक नाम दे।
    Sustain- इसे हर दिन दोहरायें और आदत बना ले।
    • 1s- SHORT छंटाई -

    जितना use में उपयोगी हो उतनी ही वस्तु अपने पास रखे जो use की नहीं है उसे अलग करके रखे। जितना जरुरी हो उतना ही सामान मगवाये।अपने आस पास नजर डाले और तय करे की कौन  सा सामान आपके लिये उपयोगी है और कौन  सा आपके काम का नहीं है। अनावश्यक वस्तुओ से ना ही सिर्फ Work workstation गन्दा  होता है बल्कि जरुरी वस्तुओ का समय पर मिल पाना उनकी संख्या का अनुमान लगाना काफी मुश्किल हो जाता है।क्या आपको अपने कार्य स्थल के बारे में अभिमान है। हमारे अन्दर चीजो को जमा करने व  रखने की आदत होती है। कुछ ऐसी चीजे हमारे पास होती है जिसकी जरुरत हमें उस समय नहीं होती है जिससे सही से काम करने में problems होती है। इन वस्तुओ को छटाई  करने के लिये पहले उन वस्तुओ को पहचानना और उनकी सूचि बनाना पड़ेगा क्या आपको इन वस्तुओ की आवस्यकता है यदि किसी को भी इन वस्तुओ की आवस्यकता नहीं है तो वास्तव ने वे अनावश्यक है।  हमें ये पता लगाना है की हमें किसकी जरुरत है और किसकी जरुरत नहीं है। 

    1. उपलब्ध स्थान का प्रभावित उपयोग करे। 
    2. उन्ही वस्तुओ को इकठ्ठा करे जिनकी आवश्यकता हो। 
    3. अवांछित वस्तुओ को हटा दे। 
    4. लाल tag प्रणाली का उपयोग करे। 

    -What is Quality and Quality policy in hindi
    1. 2s- SET IN ORDER यथास्थान (व्यवस्थित रख रखाव )-
    सभी वस्तुओं के लिए जगह होनी चाहिए और सभी वस्तुए अपनी अपनी जगह पर होना चाहिए। सभी वस्तुओ के लिये स्थान निर्धारित करे तथा सभी वस्तुओ को  निर्धारित जगह पर रखे  वस्तुए निर्धारित जगह पर होने से उन्हें उपयोग में लाने के लिये कम समय लगता है। हर चीज के लिए अपनी एक जगह होनी चाहिए और हर चीज उपयोग करने के बाद अपनी उसी जगह पर होनी चाहिए। चीजो को व्यवस्थित रूप से सही जगह पर रखने से आपका काम आसान होगा बल्कि आपका Area  भी साफ़ सुथरा दिखाई देगा। जैसे बड़ी चीजो के लिए अलग जगह छोटी चीजो के लिए अलग जगह। चीजो को ऐसे रखे जिसे उपयोग करने में आसानी हो।

    1. सभी वस्तुए आसानी से मिल सके। ppt and pdf
    2. साइनबोर्ड का  उपयोग करे।
    3. सभी चीजों के लिए जगह और सभी चीज अपनी जगह पर रखे।


    • 3s- SHINE सफाई -

    अपने कार्य स्थल, मशीनो  तथा उपकरणों को बिलकुल साफ़ रखना चाहिए। मशीनों तथा floor की साफ़ सफाई में अगर कोई भी दरार या leakage दिखाई दे तो उस पर तुरंत Action लेना चाहिए ऐसी problems को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मशीन और उपयोग में आने वाले उपकरण व अपना Area समय समय पर साफ़ करना चाहिए। सफाई महत्वपूर्ण है लेकिन उस समय नहीं जब मशीन चल रही हो। क्या आप मशीन को उसी समय check व साफ़ करते है जब वह काम करना बंद कर देती है। मशीनों की सफाई व जांच के लिए एक नियमित समय रखना चाहिए।

    1. हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी स्वयं निभाना चाहिए।
    2. काम के स्थान पर साफ़ -सफाई रखे। counting aur hindi 5s picture
    3. problems को पहचाने और उसे सही समय पर उसपर काम शुरू करे।
    • 4s- STANDARDIZE सही मानकीकरण  -
    प्रथम 3 s का प्रतिपालन  सुनिश्चित करना एवं उपयुक्त नियमो का पालन करना। पहले 3 s का standard बनाना हर department से एक व्यक्ति को इसकी जिम्मेदारी सौपना और समय समय पर उसे check करना की पहले 3 s का प्रतिपालन हो रहा है या नहीं।

    अच्छी Houseekiping की आदत बनाय  रखे अगर हमें अच्छे मापदण्ड कायम करने है। और इसके लिये प्रयत्न आवश्यक है, यदि हम अच्छी देख भाल नहीं करते है तो हमारा कार्यस्थल अविकसित हो सकता है।

    हम अपने कार्यस्थल पर हर रोज 8 से 10 घंटे बिताते है क्या हम अपने आपको सुरक्षित और खुश पाते है।काम की देखभाल और सफाई आवश्यक होती है और इस तरह हम अपने कार्य स्थल में सुधार ला सकते है और अपने future को आसान बनाते है। yaha par pdf,ppt,training,housekeeping and fullform of 5s.
    1. इन प्रक्रियाओ को लगातार करना है। 
    2. काम में अधिक से अधिक लोगो को involve होना चाहिए। 
    3. हर काम जो हम करते है उसकी एक check sheet बनानी चाहिए। 
    • 5s- SUSTAIN स्व-अनुशासन -


    प्रत्येक कार्य करते समय,अनुशासन सहित निर्धारित नियमो का पालन करना चाहिए।  Example के लिये प्रत्येक कार्य को निर्धरित समय एवं कार्य प्रणाली के अनुसार कार्य करना, सुरक्षा नियमो का पालन करना,सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करना इत्यादि। 

    हमें अपने वा management के नियमो का पालन करना चाहिए। अच्छी housekeeping के लिये ये आवश्यक है की हम प्रयास करे और उसकी कीमत को समझे और ये अपने आप पर निर्भर करता है।  ये जिम्मेदारी अधिक कार्य करने में ज्यादा महत्व रखती है।  हम जो काम करते है वो काफी नहीं होता हमें चाहिए की हम दूसरे व्यक्तियों का साथ दे और साथ मिलकर काम करे। 

    1. आत्म अनुशासन बनाय रखे। "counting in hindi picture"
    2. Teamwork और अनुशासन के माध्यम से लक्ष्यो को पूरा करे। 
    3. सभी कर्मचारियों को प्रशिछण दे। 
    4. 1s-2s-3s-4s लगातार दोहराये।
    5s को impliment करते समय ध्यान में रखे इन बातो को - 
    5s को क्रम में impliment करना चाहिए कोई भी व्यक्ति 2s या 3s को करने के बाद में पहले 1s को प्रारम्भ नहीं कर सकता है। यदि किसी company में store department में 5s करना चाहते है तो वहा पर system ऐसा होना चाहिए की आने वाले सामान को रखने की जगह होनी चाहिए। किसी भी confusion से बचने के लिए समय समय पर चेक करते रहना चाहिए। system को मजबूत बनाने के लिए सभी लोगो का सामिल होना बहुत जरुरी है सभी को system से काम करना होगा तभी आप इसे impliment कर सकेंगे। 
    Implimentation कैसे करे -
    Management को लाभ प्राप्त करने के लिए 5s method को impliment करना चाहिए। 5s को अपनाने का decision लेने के बाद इसके बारे में सभी को बताना चाहिए इससे related training देना चाहिए जैसे 5s क्या होता है इसे कैसे impliment किया जाता है इससे क्या लाभ है और इसे नहीं करने से क्या नुकसान या हानि हो सकती है।   इसके बाद में 5s start करने के लिए action plan प्रस्तुत किये जाते है। जैसे - अभी हम किस स्थति में है present time में, हमें कहा पहुंचना है और कैसे impliment करना है। 
    5s कैसे करे -
    1. जिस चीज की हमें जरुरत नहीं है उसे वहा से हटा दे।
    2. सभी चीजों को जगह पर रखना चाहिए और उनके लिए जगह निर्धारित होना चाहिए । चीजों को जगह के अनुसार रखे उन्हें फैलाये नहीं। counting in hindi picture
    3. अपने कार्यस्थान की सफाई करते रहे और दुसरो को गंदा करने से मना करे उन्हें 5s के बारे में बताये।
    4. हमें लगातार इन नियमो का पालन करना चाहिए।
    5s- के लाभ -
    5s पालन करने के कई सारे लाभ है 
    1. कार्य सरल होता है, जिससे employee के कार्य के प्रति रूचि बढती है। pdf and ppt.
    2. प्रत्येक कार्य सुविधापूर्वक एवं सुरक्षित ढंग से होता है, जिससे दुर्घटना की संभावना नहीं रहती।
    3. मिलजुलकर कार्य करने से आपसी भाईचारे में ब्रद्धि होती है। fullform,training,dearhindi.com
    4. कार्य-जीवन में सुधार से employee के मनोवल में ब्रद्धि होती है। posters fullform of 5s download.
    5. उत्पादन की गुणवत्ता में ब्रद्धि होती है।
    6. प्रत्येक के विकास एवं संस्थान की निरंतर प्रगति के लिये 5s अत्यंक आवश्यक अंग है।
    7. महत्वपूर्ण समय बचता है।
    8. wastage और कमियों को आसानी से पहचानने में सहायता करता है।
    9.काम करने के लिए हमें साफ़ सुथरा वातावरण प्रदान करता है।

    5s  ना करने के नुकसान हानि  -
    5s सही तरीके से नहीं करने पर क्या क्या समस्याएं आ सकती है।

    1 असुरक्षित work place मिलता है।
    2 अगर कोई auditor या customer आता है तो वह असंतुष्ट हो सकता है।
    3 किसी भी चीज को खोजने में समय लगता है जिससे काम करने वाले लोगो में तनाव पैदा होता है।
    4 समान सही समय पर नहीं मिलने से बहुत बड़ा नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

    इन्हे भी पढ़े -

    5s

    5S is a Japanese technique - With the help of management and staff and 5S, keeping a good workplace, machine, equipment etc. it is mainly a thoughtful way to establish a system in 5S workstation and systematic maintenance. It can be obtained in 5 steps, respectively.

    what is 5s

    5 steps of 5s.

    1s - sort  2s - set in order  3s - shine  4s - standardize 5s - sustain
    Implimentation of 5s 
    Management should impliment 5s method to gain profit. After taking a decision to adopt 5s, all should be told about it related to training like 5s, what happens, how it is implied, what is the benefit from it and what can be the loss or loss of it by not doing it. After this, an action plan is presented to start 5s. Like - where we are currently in the present time, we have to reach and tell how to impliment.
    How to do 5s -
    1. Remove the thing that we do not need it.
    2. All things should be kept in place and their place should be determined. Do not spread them according to the place according to the place.
    3. Clean the workspace and refuse to mess others, tell them about 5.
    4. We have to follow these rules constantly.

    Methodology to impliment 5s-

    SHORT WAY of 5s
    Short- Keep whatever you want and remove everything else.
    Set in order- a place for everything and everything in its place.
    Shine-Cleaning the area where you keep the nessesary thing.
    Standardize- make up the rules follow and enforce them.
    Sustain - Do it every day and make a habit. 

    Keep these ideas in mind when applying 5s-

    5s should be implanted in sequence No one can not start the first 1s after doing 2s or 3s. If you want to do 5s in the store department in a company, then there should be a system on it that there should be space to keep the incoming goods. To avoid any confusion, keep checking from time to time. To strengthen the system it is very necessary to join all the people, everyone will have to work with the system only then you will be able to impliment it.

    Vernier Caliper और micrometer क्या होता है

    Vernier Caliper और micrometer क्या होता है  definition, इसका least count 0.02 mm or .001 (inch)होता है training,ppt,pdf dial difinition   alpatmank
    Vernier Caliper (वर्नियर कैलिपर) का use height (ऊंचाई) को measure  करने के लिए diameter (व्यास) को measure करने के लिए और depth (गहराई) को measurement करने के लिए use किया जाता है।  इसमें हम दो scale के बीच का जो अंतर होता है उसके base पर हम इसको measurement करते है।  इसका least count 0.02 mm or .001"(inch) होता है। यानी हम Vernier Caliper से कम से कम 0.02 mm or 0.001"(inch) की reading को measurement कर सकते है। parts of vernier caliper and its uses.formula of scale pdf ppt dial scale.vernier caliper use in hindi, scale in inch and video in hindi.diagram and difinition.
    Vernier Calipers के main components:-
     main scale , vernier  scale , depth measuring bar, measuring jaws

    vernier caliper

    Vernier Calipers का diagramvernier caliper diagram

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    1. outside jaws (किसी वस्तु की  मोटाई को measure करने के  लिए)
    2. inside jaws (किसी वस्तु के अंदर की गहराई को measure  करने के लिए)
    3. depth probe (किसी वस्तु की गहराई को measure करने के लिए)
    4. main scale(इसमें cmमें रीडिंग ली जाती है)
    5. main scale(इसमें inch में रीडिंग ली जाती है)
    6. vernier scale (इसमें cm में रीडिंग ली जाती है)
    7. vernier scale (इसमें inch में रीडिंग ली जाती है)
    8. retainer (आगे पीछे arjest  करने के लिए)
    Vernier Calipers का list count कैसे निकाला जाता है :-
     Vernier Caliper की जो 50 readings होती है वो 49 main scale की reading के बराबर होती है। तब Vernier Caliper  का list count होगा ,

    (1 main scale reading=1 mm )
    (1 Vernier scale reading =49/50 mm=0.98 mm)

    least count =1 main scale reading -1 Vernier scale reading
    तो finally हमारा  least count  होगा।

    least count =1 mm- 0.98 mm 
    least count =0.02 mm (यह Vernier Caliper का least count होता है )

    parts of vernier caliper and its uses vernier caliper use in hindi, scale in inch anc video in hindi aur diagram and difinition. formula of scale pdf ppt dial scale.

     Vernier Caliper पे reading कैसे लेते है :-
    Example 

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    Vernier Caliper की reading लेने के लिए हमें एक formula का use  करना पड़ता है।

    Dimension measured = main scale reading➕(vernier scale reading ❌ least count )

     यहा पर main scale reading की reading 24mm vernier scale reading की reading 35mm  और least count 0.02 है। 

    Dimension measured =24 mm + (35 mm0.02 mm)

    Dimension measured = 24 mm + 0.7 mm

    यह हमारे component की Final reading है  = 24.7 mm

    Digital vernier caliper images-


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    Digital vernier caliper-


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    what is micrometer? micrometer क्या होता है ?


    माइक्रोमीटर (micrometer) का use किसी भी small object कि लम्बाई(length) व्यास (diameter) और मोटाई (thickness) को measure करने के लिए use किया जाता है और यह Nut and Bolt के सिद्धांत पर काम करता है और इसका least count (काम से काम reading को आसानी से माप सकता है) 0.01 mm OR 0.001 cm होता है। circular scale में  50 mm की होती है। 


    Micrometer (Screw Gauge) Theory :- 
    अगर हमारे पास कोई भी पतली शीट है तो हम उसकी मोटाई  भी निकाल सकते है। किसी पेपर की कितनी मोटाई है यह पता कर सकते है इसके लिए हमें screw gauge की जरुरत पड़ेगी इसे micrometer भी कहते है। 
    इसका नाम screw gauge क्यों है। gauge मतलब किसी चीज का diameter या वो कितना मोटा है इसको नापना और screw का मतलब हुआ इसकी जो बनावट है screw के जैसी है।  इसकी सहायता से हम किसी तार की मोटाई  thickness निकलते है तो इसका पूरा नाम हुआ screw gauge .

    Micrometer

    किसी भी object की thickness निकालने के लिए हमें किन किन चीजों की आवश्यकता होगी ?

    पहला screw gauge की जरुरत होगी। दूसरा जिस चीज की हमें thickness निकलना है और तीसरा मीटर स्केल। 

    माइक्रोमीटर (screw gauge) के स्क्रू को जब clock wise घुमाया जाता है तब यह आगे की तरफ जाता है और जब इसे anti clock wise घुमाया जाता है तब यह पीछे की तरफ जाता है। micrometer में जो चुडिया बानी हुई होती है वो पास पास होती है और इन सभी के बीच का space एक बराबर होता है। इन दो चूडियो के बीच का जो ऊपरी सिरे का जो अंतराल होता है उसे हम इन दोने के गैप को हम चूड़ी अंतराल कहते है या इसे pitch भी कहते है। 

    जब हम circular  स्केल को  पूरा एक चक्कर घुमाते है (clockwise or anti clockwise ) तो यह। 0.5 mm आगे या पीछे की तरफ जायेगी। circular scale में 0 से 50 तक mark बने हुए होते है इसका मतलब इस circular scale पर 50  division होते  है। 

    जब हम circular  स्केल को  पूरा एक चक्कर घुमाते है तो जितना distance liniar scale आगे या पीछे जाती है उसे कहतें है पिच। या कह सकते है चूडियो के बीच की दूरी पिच कहलाती है। हमारे पास जो screw gauge है इसमें दो चूडियो के बीच की दुरी 0.5 mm होती है। circular  स्केल को 50 parts में divide किया गया है।  जब हम इसको पूरा एक चक्कर घुमाते है तब यह 0.5mm आगे या पीछे जाता है। इसका मतलब ये हुआ इसका least काउंट  0.5mm का 50 वा हिस्सा या 0.5 /50  मतलब 0.01 mm  होता है।

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    least count =  0.5 /50 =  0.01 mm होता है  और  सेंटीमीटर में  0.001cm  और  मीटर में  0.00001m least count  होता है। 

    micrometer के main components :-
    1- Sleeve  ( इसके ऊपर main scale होता है )
    2- Lock nut (reading लेने से पहले lock nutका use किया जाता है ताकि वह हिले नहीं )
    3- Spindle (यह माइक्रोमीटर में right  side में लगी हुई होती है और यह  left और right की तरफ move करता है )

    4- Anvil (यह माइक्रोमीटर में left side में लगी हुई होती है और यह एक जगह fix होती है )
    5- Frame (यह माइक्रोमीटर का frame होता है इस frame से सभी components जुड़े होते है )
    6- Thimble (यह sleeve के साथ में जुड़ा होता है और इसमें circular scale होता है और  circular scale में  50 mm की scale होती है )
    7- Ratchet stop ( यह spindle को move करने के काम आता है)

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    micrometer का least count कैसे निकला जाता है? 
    जब thimble को पूरा एक चक्कर घुमाया जाता है  तब spindle move 0.5mm आगे जाता है। इसे हम pitch बोलते है। number of division on circle scale = 50mm होता है। 

    least count का formula  होता है। 
    least count = pitch/number of division on circle scale
              least count = 0.5/ 50 = 0.01mm
    यह micrometer का least count होता है। 

    माइक्रोमीटर की reading कैसे लेते है ? Micrometer की  Reading के लिए  FORMULA होता है
    Dimensions  measured = Main scale reading +(Thimble scale reading 🗙 Least count)

    हमें Micrometer में किसीभी रीडिंग को Measure करने के लिए इसी Method का उपयोग करना पड़ेगा। 

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    यहाँ पर हम spindle और anvil के बीच एक छोटे से component को रखते है और thimble की मदद से इसे सेट करते है और lock nut की मदद से इसे lock करते हैतब हमें  main scale कि reading (5+0.5) यानी की हमारे  main reading है 5.5 mm . thimble scale की reading है 28 mm. इस reading को हम formula में सेट करेंगे। Vernier Caliper और micrometer क्या होता है 

    Dimensions  measured  = main scale reading +(thimble scale reading 🗙 least count)

    Dimention  measured  = 5.5mm +(28mm 🗙 0.01mm)

    Dimention  measured = 5.5mm+ (0.28mm)

    Final Dimention  Reading = 5.78 MM

    ये हमारे component की final reading होगी।

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    कंप्यूटर किसे कहते है यह कितने प्रकार का होता है Computer Kise Kahte Hai Yah Kitne Prakar Ka Hota Hai

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    कंप्यूटर किसे कहते है?- What is computer?
    Computer एक Electronic Device है जो डेटा लेता है और उस पर Processing करके पूर्ण परिणाम देता है। यह Hardware और Software से मिलकर बना होता है।  

    Oxford Dictionary के अनुसार कंप्यूटर का अर्थ  है - कंप्यूटर एक स्वचलित electronic machin है जो अनेक प्रकार की तर्क पूर्ण गणनाओ (Logical calculation)के लिए प्रयोग किया जाता है। 

    computer का full form होता है (C.O.M.P.U.T.E.R.) Common,Operating, Machin, Particular, Used for, Trade, Education, Research होता है। 

    common ( सामान्य )
    operating ( चलना  )
    machin ( यंत्र  )
    perticular ( विशेष रूप से )
    used for( इस्तेमाल के लिए )
    trade( तकनीकी )
    education( शिक्षा )
    research( खोज )

    इन सारे शब्द को मिलाकर कंप्यूटर शब्द का विकाश हुआ है। computer एक electronic device है जो प्राप्त information को एक command के अनुसार analyse करके कम से कम समय में सत्य (true) एवं विश्वसनीय(reliable) परिणाम (result)प्रस्तुत (present)करती है। कंप्यूटर शब्द की उत्पत्ति कंप्यूट (compute) शब्द से हुई है जिसका मतलब होता है गणना (calculation)करना अथवा गिनती (count)करना। इसीलिए कंप्यूटर को एक संगणक युक्ति (computing device) के रूप में जाना जाता है।   

    आज का युग computer का युग है बिना computer के जीवन अधूरा महसूस होता है computer के बारे में ऐसी बहुत सी बाते है जिन्हे आप नहीं जानते होंगे क्या आपको पता है की computer को हिंदी में क्या कहते है? कंप्यूटर को हिंदी भाषा में अभिकल यंत्र (programmable machin) कहते है इसे संगणक भी कहा जाता है। कंप्यूटर एक electronic device होता है जो की हमारे जरुरी data को हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों को input के रूप के ग्रहण करके उनको अपने अंदर लगे storage device में सुरक्षित रखता है इस डाटा को भण्डारण (Storage) कहा जाता है। 

    computer दिए गए  numaric तथा logical क्रियाओ को क्रम से automatic रूप से करने में पूर्णतः सक्षम है। 
    कंप्यूटर जो डेटा लेता है हम उसे input डेटा कहते है इसी input डेटा को processing करके जो result हमें प्राप्त होता है उसे हम output डेटा बोलते है। 

    कंप्यूटर स्टोरेज (computer storage)-
    computer हमारे जीवन के हर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है यह एक साथ कई सारे काम कर सकता है वो भी बिना किसी त्रुटि के कंप्यूटर में उच्च कोटि की storage छमता होती है वह अपने अंदर डेटा को storage कर सकता है इस storage को internal storage बोलते है।  इसके अलावा कंप्यूटर बाहरी device को भी संग्रहित कर सकता है जिसे हम external device storage बोलते है।  

    कंप्यूटर कितने प्रकार का होता है (types of computer)

    computer के प्रकार कंप्यूटर पर काम करने के प्रकार पर आधारित है।

    काम करने के आधार पर कंप्यूटर के तीन प्रकार होते है- 


    1. Analog computer 
    2. Digital computer
    3. Haybrid computer 
    • Analog computer -
    Analog कंप्यूटर भौतिक आंकणो (Physical data)में काम करते है। जैसे की hydrolic pressor तापमान और electrical आंकणो की गणना करते है। example hand watch में date दिखाना time दिखाना ये सब analog computer का काम होता है। इसके अलावा कार की speed दिखाना और fuel कितना है indicator देखना यह सब काम analog computer का होता है। 
    • Digital computer -
    Digital computer bynari number system 0 और 1 का इस्तेमाल करके बनाये जाते है। example - लैपटॉप ,personal कंप्यूटर etc . digital computer में जब हम कंप्यूटर पर कोई program देते है तो कंप्यूटर उस पर process करके हमें output देता है। यहाँ पर कंप्यूटर डिजिटल 0 और 1 का उपयोग करके हमें output देता है इसलिए हम इसे digital कंप्यूटर बोलते है।
    • Hybrid computer -
    हाइब्रिड कंप्यूटर में analog और digital computer दोनों मिलकर बनता है। example -मनुष्य के hard का ECG ( ElectroCardioGram - Electropower द्वारा hard की धड़कनों का रेखाचित्रण ) निकालकर उसका report print करने की सुविधा देता है।  
    इसमें analog computer का काम hard की धड़कने गिनना है और digital कंप्यूटर का काम report बनाकर print करना होता है। 

    Dimensionऔर गति के अनुसार computer के चार प्रकार होते है  -


    1. Micro computer 
    2. Mini computer 
    3. Mainfrem computer 
    4. Super computer 
    Personal Computer क्या है?
    घर या office में हम जिन कंप्यूटर का इस्तेमाल करते है उसे हम personal computer कहते है। personal कंप्यूटर को single user computer या desktop computer के नाम से भी जाना जाता है। क्योकि यह अपने table पर आराम से बैठ जाता है और हम आराम से उस पर काम कर सकते है। smart phone भी एक personal computer होता है मोबाइल फ़ोन से आप Internet,Officework,Email जैसे कई सारे काम आसानी से कर सकते है। 

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    yaah ek check sheet ka example hai yaaha par defects left side me diya gaaya hai.center me par day defect right side me overall weekly defect diya gaaya hai. hum check sheet ka istemaal karte huye har din ka data collect kar sakte hai. overall defect me hame yah pata chal jaata hai ki is week me kon sa defect kitni baar aaya hai. yah check sheet hame help karta hai data ko collect karne me.

    • 2.Cause and effect diagram.(Cause and effect diagram /Fishbone diagram/Ishikawa diagram Bhi kaha jaata hai) - in hindi

    Cause and effect diagram yah ek root couse analysing ka tool hota hai isme kisibhi problem ko short out kiya jaata hai isme yah pata chal jaata hai ki  problem kis wajah se aa rahai hai. 

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    Is diagram me Right side me effect likhte hai aur inke jo causes hai unko upper aur lower side me likhte hai aur cause ko identify karne ke liye 6M ( MAN, MACHIN, MATERIAL, METHOD, MEASUREMENT, MOTHER NATURE) or 4M KA  Istemall kiya jaata hai. YA phir aap isme 4P ka bhi use kar sakte hai ( People, Process, Product, Policy procedures) inhe primary causes kaha jaata hai.

    Fishbone diagran banane ke liye Brainstorming kiya jaata hai Brainstorming karne ke baad me jo causes nikalta hai un causes ko 6M me divide kar diya jaata hai baad me phir validation karke us par root cause identify kiya jaata hai. fishwon digram bahut hi importanttool hota hai hame potensial causes identify karne ke liye .



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    1. Hame problem ke causes ko identify karne me madad karta hai. 
    2. Brainstorming ke relation ko bhi stablish karne me madada karta hai.
    3. Ye hame potential causes ko identify karne me madad karte hai.
    4. Ye teem work system ko laagu karta hai. 

    • 3.Flow Chart/Stratification chart - Flow Chart in hindi /Stratification chart in hindi

      ye kafi important tool hai 7 qc tool ka ye hame kisi process ke seqwens ko samjhne me help karta hai.

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        Flow chart ke symbols -

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        isse hame process ko samajhne me aasani hoti hai aur usme jo hamare defects hai hum unko identify karke us par improvements kar sakte hai.training ppt pdf hindi me dearhindi

        • 4.Histogram - Histogram in hindi


          yah too data collect karne ke baad me uske distribution ko samajhne ke liye kaam me laaya jaata hai.
          isko jyadatar  (SQC) Statistical Quality Controlme me bhi istemall kiya jaata hai.

          Histogram ka use karne ke liye hamare pass me daata hona chahiye jitna jyada daata hamare pass me rahega to hamara analysis aur utna behtar hoga.

          Example ke liye maan lijiye aapke pass kuch is (heating temp. image)tarah ka moulding machin ka temperature ki reading aapka emplyee la kar deta hai isko dekhne ke baad me hame kuch bhi samaj me nahi aata hai. 

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          Ab hum isko samajhne ke liye tools ka istemaal karege. 

          Tools ke istemaal se hame is data ko conclude karne me aur us par action lene me aasani ho jaati hai. sabse pahle hum is data ko sumrise karte hai  ( pic no-1 ) isme hame ye pata chalta hai ki jo moulding mchin ka temp. hai wo kaha se start ho raha hai. yaha par minimum temp. 200'c hai aur maximum temp.380'c samajhne ke liye liya gaaya hai. hamne 200'c se 380'c data ko 10 range me baat diya 220 to 220,220to 240 last me 360 to 380 is tarah se isko 10 alag alag temp. me alag kar diya. isse hame yaah pata chalta hai ki kis range ke kitne data aa rahe hai jisse hame ise samajhne me aasani ho. 7qc tool ppt hindi language and pareto chart in hindi

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          Ab iske baad  hum is sumrise  data ko  histogram  me dekhte hai. yaha  par aasani  se  hame pata chal jaata hai ki temp. ka jo range  hai wo 200'c se 380'c ke beech  me hai. yaaha par  lower  specific 200'c aur upper specific 380'c diya hai aur kitne daata point kis range me aaye hai ye bhi hame samaj me aa raha hai. 
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          yaaha par hame pata chal jaata hai ki machin ka temp. lower side ki taraf jaa raha hai yaa upper side ki taraf jaa raha hai. Ab hame  yah  pata chal   jaata   hai ki hamare machin ki condition kya hai agar temp. hame jitna chahiye utna hai to achhi baat hai agar yah temperature sahi nahi hai  to hum  Maction ke temperature sudharne ke liye action le sakte hai.
          5.Control chart - Control chart ih hindi
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