Audit in hindi

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what is audit?- यह एक systamatic(व्यवस्थित) और indipendent(स्वतंत्र) व documeted process होती है और इसके आलावा  कैसे कैसे ऑडिट करना चाहिए systematic point of view(दृष्टिकोण) होना चाहिए हम system को objectively (निष्पक्ष) evaluate (मूल्यांकन करना)करेगे audit evidence को collect करने के लिए।kya hota hai

audit kya hai,audit notes,management system,audit meaning,internal audit,officer,report,companyयह जानने के लिए की system हमारा काम कैसे कर रहा है मतलब audit का जो criteria है आप जिस purpuse के लिए audit कर रहे है आपने कुछ criteria define किया होगा। ऑडिट basically documental process को follow करते हुए indipendently systemetic approch (स्वतंत्र रूप से व्यवस्थित दृष्टिकोण) के साथ में जिस एरिया का आप audit कर रहे है वो आपके criteria को fullfill कर रहा है की नहीं इसे देखने के लिए  आडिट  किया जाता है।   

Audit basically साल भर organization में काम कैसे हो रहा है यानी की पूरे साल की जांच की जाती है इसमें  ऑडिट उन्ही लोगो का किया जाता है जो अपना business करते है। ऑडिट में साल भर का Details निकाला जाता है यह Income Tax Department करता  है। इसमें यह देखा जाता है की business में आपने income and  expense (आय और व्यय) नियनो के हिसाब से किये है या नहीं। इसके अलावा companiya खुद अपना internal ऑडिट करती रहती है। 

Types of Audits in hindi- 

Basically तीन प्रकार के ऑडिट होते है product, process एंड system AUDIT लेकिन इसके आलावा और ऑडिट होते है जो की इन तीनो ऑडिट को support करते है  जैसे एक ऑडिट को internal या external ऑडिट भी कहते है internal ऑडिट वह ऑडिट होता है जो की internally कनेक्ट किया जाता है मतलब यहा पर organization के लोग दूसरे dipartment में जाकर ऑडिट करते है internal ऑडिट कहलाता है। और external ऑडिट वह होता है जो बाहर के लोग होते है जो की organization का ऑडिट करते है इसे external ऑडिट कहते है। इसके आलावा।
1- product
2- process
3- system
4- dockaudit
5- layout audit
6- layered ऑडिट

  • Process audit in हिंदी -
Process audit में हम verification करते है की हमारा जो process  या हमने जो work decide किया था की हम अपना ये work इस work-instruction से करेंगे या हमने जो parameter set किया था तो क्या ये सारे parameters controlled condition में चल रहे है या नहीं चल रहे है क्योकि अगर process parameter सही नहीं होगा तो आपका output सही नहीं निकलेगा तो basically process ऑडिट में हम उन parameter को check करते है जैसे work-instruction, control plan इनके refrense से हम यह देखते है की हमारा जो parameters है वह सही condition में चल रहा है की नहीं चल रहा है। इसे कहते है process ऑडिट। 

इसमें हमने जो भी standard guidelines बनाये थे उन सभी guideline को follow किया जा रहा है की नहीं किया जा रहा है मतलब हमने अगर किसी एक work को पूरा करने के लिए 10 stap लगते है तो क्या ये 10 step follow हो रहे है या नहीं - कही पर बायपास तो नहीं किया जा रहा है इन सब steps को verify करना process audit कहलाता है। 
  • product ऑडिट
Product ऑडिट में हम processing होने के बाद में जो प्रोडक्ट निकलता है तब उनके Dimension को check किया जाता है। जो भी हमारा   control plan  या workinstruction में जो भी पैरामीटर हमने बनाये है उसके हिसाब से चेक करते है की ये सारे parameter सही थे या नहीं थे इसके अलावा parts की testing भी चेक की जाती है। 

  • System Audit 

system ऑडिट तीन प्रकार के होते है  first party audit, second party ऑडिट ,third party audit.


First party audit :- हम इसे  Internal Audit भी कहते है। organization या कंपनी खुद ही यह ऑडिट  कर सकती है अपने द्वारा या फिर किसी दुसरे agency को भी hire कर सकती है अपने Internal audit के लिए। किसी भी system में एक "Internal ऑडिट " का एक shedele होता है इसमें हर एक function का friquency के base पर audit किया जाता है।  यह किसी कंपनी में 3 month में एक बार या फिर 6 month में एक बार या फिर एक annualy साल में एक बार audit जरुर  किया जाता है। dearhindi.कॉम 

अगर आप internal ऑडिट कर रहे है तो आपने जो assissment किया है उस एरिया की process की system को नजर में रखते हुए frequency को dynamik रखिये जो function या process आपको ज्यादा critical नजर आता है ज्यादा problem है ज्यादा issue है उसकी frequency को थोडा high रखिये जहा पर problem कम है वहा आपको frequency थोडा कम कर लेना चाहिए। aur kya hona chahiye kya hai 

अलग अलग department में सभी aria का नाम लिखना होता है और फिर frequency decide किया जाता है की कौन कौन  से एरिया का कब कब ऑडिट किया जाय। अगर आप first time audit करते है तो आपको department का नाम कौन audit कर रहा है उसका नाम कब audit किया जायेगा उसका time and date fix किया जाता है।
Second party audit:- 2nd  time ऑडिट तब होता है जब कोई customer अपने supplyer के यहाँ audit करने जाता है second party AUDIT basically customer और suppyler के बीच में होता है customer suppyer का audit करता है second party audit में customer और suppyler का business relationship होता है। 

Third party ऑडिट :- इसमें एक external agency certification के purpuse से आपके कंपनी में ऑडिट करेगी काफी सारी agency है जो की आपके कंपनी का assessment (मूल्यांकन) करती है अगर आप criteria को fulfill करते है तो बाद में आपको इसका certificate दिया जाता है। third party audit में कोई business relationship नहीं होता है यह केवल certification के purpuse से आते है आपके system का assessment (मूल्यांकन) करते है। 
  • Layout audit-
Layout ऑडिट में हर एक dimension को identified किया जाता है और उन्हें चेक किया जाता है चेक करने के बाद जो report तैयार होती है उसमे हम देखते है की कोई issue है की नहीं है अगर कुछ issue पाया जाता है तो हम उसपर Action लेते है और उसको Improve करते है उसका layout तैयार करते है इसे कहते है layout ऑडिट। 
  • Layered ऑडिट
Layered ऑडिट में company के अलग अलग लोग audit करते है जैस किसी एक department का supervisor ऑडिट किया फिर बाद में HOD (head of department) ने ऑडिट किया इसके बाद में HR department  के लोग  ऑडिट करते है पूरे plant का head ऑडिट कर सकता है अलग अलग layer के लोग ऑडिट करते है इसलिए इसे लेयर्ड ऑडिट कहते है अलग अलग lable के लिए अलग अलग चेक लिस्ट हो सकती है या फिर single  चेक लिस्ट को crossverify भी कर सकते है।  
  • Dock-audit -  
Dock-audit में हमारा जो finish good material होता है जो की dishpatch condition में होता है और हम यहाँ पर product का verification करते है जैसे packaging सही होना चाहिए box damage condition में नहीं होना चाहिए sticker या lable सही से लगा हुआ होना चाहिए quantity short नहीं होना चाहिए कुछ भी चेक कर सकते है इस condition में product के verification को हम dock audit कहते है यहाँ पर cross verification किया जाता है 100 % verification नहीं किया जाता है। 

iso in hindi - certification of quality management kya hai

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Har vyakti ko yah janna bahut jaruri hota hai ki iso hota kya hai. iso certification kya hai aur kyo iski jarurat padti hai kya yah center government provide karti hai ya nahi.

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ISO kya hai -

ISO ka full form hota hai  (International Organization for Standardization) Yah ek international organization hai lekin jo certificate issu hota hai wo certificate iso nahi deta hai iso ek non government organization hai iske under jo bhi certificate issue hota hai wah shirf number mentain karta hai lekin aapko third party agency hi aapko iso ka certificate provide karti hai. agar aapko iso ka certificate lena hai to aapko direct iso se contact nahi karna hai iso kisi bhi company ya organzation ke liye certificate provide nahi karta hai. aap ise lene ke liye kisi certified agency ke dwara unse aap contact karke iso ka certificate le sakte hai.


iso ek quality management system hai jo quallity management karati hai aapke compny apke system ko ya aapke education center ko iso quality management system deti hai aur yah independent non government organization hai yah government ka nahi hai yah non government organization hai iska government (sarkaar) se koi matlab nahi hai. iski 162 National standard  bodies ke paas iso ki membership hai. agar hame iso ka certificate lena hai to hame government ke pass nahi jaana hai india me iski membership 162 logo ke pass hai. in 162 member me se kisi bhi member se iso ka certificate le sakte hai government iso ka certificate provide nahi karti hai.
ISO ke andar kya hota hai :-  Har ek country ka alag alag ek authorized unit hota hai  jaise india me BIS hai  Bureau of Indian Standards isme india me jo bhi kaam ho raha hai uska standard BIS hi nirdharit (deternined) karta hai. iso ka shirf certificate milne se aap apni company ko iso certified nahi kah sakte hai iske sath me ek srtandard number hota hai har ek product ya categry  ke liye alag alag ek number hota hai  jaise iso 9001or 9008 ese karke certificate milta hai.

9001 quality managemant mentain karta hai and yah indicate karta hai ki iska quality sahi hai. yah certificate kewal quality ke liye valid hota hai iske bahut saare standard number hote hai jo ki alag alag kaam ke liye lag alag hote hai. iso ka certificate le lene se agar aap yah sochte hai ki  real me quality improve ho jayegi to ye bilkul galat hai.
iso kya hai certification meaning in hindi iska fullform and pdf language. define iso in hindi so that means iso 9001: 2015 in hindi iske project kya companies information version standard 14001and  process and cost in india.
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what is Quality in hindi - Definition and quality policy kya hai

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Quality
Jab Bhi hum koi Product kharidte hai tab hamare man me yah baat sabse pahl aati hai ki kam se kam paise me Achhi Quality waala product hame mile jaise khane ka saaman ho ya khelne ka saaman ho kiraye (rent) se room lena ho kapde kharidna ya phir koi bhi Saaman jo hum purchase karte hai sabhi me Achhi Quality ka saaman lena pasand karte hai. Achhi quality ke saaman ki maag jyada  rahti hai Aur wah lambe samay tak chalta bhi Hai.statement

Quality Policy
Kisi bhi Company me jab hum jaate hai to company ke Gate par Board me us company ki quality policy likhi hui hoti Hai. Kyo ki yah company ke liye bahut jaruri hoti hai. Ise hame janna bahut jaruri hai quality policy ko samajhne ke Liye.

Hame apni comany me kaaam karne ka tarika company me kya kaam hota hai aur kis tarah ki hum soch rakhte hai in sab ke baare me wah batata hai. 

Quality policy me company ki common vichardhara hoti hai Aur wah sab ke liye ek hoti hai  chahe wah  kisi bhi Department me kaam karta ho kisi bhi lable pe kaam karte ho.

Hum kisi bhi company ke policy ko padhege to usme ye points aapko jarur milege jisme sabse pahla point hota hai
1.customer 2. customer satisfaction 3.continuval improvement,

1. Customer- customer wo hota hai jo aapki servicess ko le raha hota hai  aap kisi bhi department me kaam karte ho production,quality maintenense HR aapka sabse pahla Maksad hota hai customer satisfaction uske liye yah janna bahut jaruri hai ki hamara customer kaun hai .
Agar aap quality ke liye kaam karte hai to aapko yah dhyan me rakhna jaruri hai ki aapse part Handling karte samay part damage na ho.

propper tarike se rakha jaaye jaha par uska nirdharit sthan hai waha par rakha jaay  aur aapagar production me kaam karte hai to aapko yah dhyan me rakhna bahut jaruri hai ki parts time to time produced hona chahiye jyada se jyada quandity me jis parts ki Requirement quality department  me hai wah part Suitable qty me hona chahiye Aisa nahi hona chahiye ki unhe jis parts ki jarurat hai wah time pe unhe na mile. Yaha Par company ke andar hum jike liye kaam karhe hai uski baat ho rahi hai.

2. Customer Satisfaction-  kisi bhi business ki kamiyaabi uske customer satisfaction se hi nirdharit hoti hai company ka customer koi bhi ho sakta hai. Hum sab jo kaam karte hai Jamare liye inter department customers Hote hai jaise Maintenense ke liye production production ke iye quality quality ke liye FG(Finish Good)store customr hai is tarah se company me internal customer hote hai aur hamare liye sabse pahla kaam wah hona chahiye ki customer satisfaction. customer ko koi bhi problem na ho time to time delevry de achhi quality me delevry de .

3 Continuval Improvement- Yaha par Hamse Ummid ki jaati hai ki hum apne process ko Lagataar improve karte rahe usme lagataar sudhar karte rahe prakrati ka ek niyam hai change aur change bahut jaruri hai agar hame is comptition me bane rahna hai Business me aage Badhna hai to hame  apne roj ke kaam me lagataar sudhar lekar aana hoga.  

Quality Policy vicharo (idea) ka dhaga hai jo hum sab ko ek sutr me badh ke rakhta hai aur hum sabko ek disha me sochne ke liye prerit karta hai taaki hum apne apne Department me choti choti Activity ko jaane Customer ko jaane aur Unke satisfaction ko hasil karne ke liye cummited rahe aur apne kary me rojana sudhar lekar aaye Taaki hum apna apne pariwaar ka Apni Company ka Puri Duniya me Name kar sake. policy statement hindi

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Yah quality policy ki Summary Hai jo hame batati hai  Ki Hame Daily kam karte samay apne customer ko dhyan me Rakhna hai aur uske Satisfaction ke liye puri mehnat se kaam karna hai.
what is Quality assurense management Factor circle in hindi.
-Difference Qa and Qc in hindi

8D problem solving techniques in hindi

8D problem solving techniques in hindi

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Ford कंपनी ने 1980 में एक problem solving process को start किया था उसे 8D या Eight Discipline के नाम से जाना जाता है। 8D का प्रयोग करने के बाद यह इतना effective (प्रभावी)साबित हुआ की इसे ford कंपनी द्वारा इसे primary document  बानाया गया और ford company आज भी 8D problem solving techniques का उपयोग करती आ रही है।

इसके द्वारा हम problem के कारणों को ख़तम करके quality को continusly improve कर सकते है। यह problem को solve करने में help करता है। इस 8D से हम future में आने वाली या present में आ रही problem को solve कर सकते है। 

हमें 8D का प्रयोग कब करना चाहिए - जब यह स्पष्ट हो जाता है की हमारे product में defect है और यह हमारे customer को satisfy नहीं कर रहा है तब हम quality को सुधारने के लिए  8D problem solving techniques का प्रोयोग करते है। 
  • 8 Discipline कौन कौन से है -

D1- Define The problem
Problem को define करना
D2- Build a Team 
Team तैयार करना
D3- Containment Action
Action लेना इसे Interim Containment Action (ICA)
D4- Determine the root cause
Root cause को determaine करना
D5- Verify the root cause 
 Root cause को verify करना
D6-Permanent Corrective Action
Permanent Corrective Action (PCA)लेना 
D7- Prevention
रोकना या निवारण करना
D8-Congratulate the team 
टीम को congratulate करना

D1- Define The problem
क्या हम जानते है actual में problem क्या है। और क्या इससे पहले भी हमने ऐसे problem को face किया है। problem से related हमारे पास क्या क्या evidence है। 

D2- Build a Team
एक बार हमें problem का पता चल गया तो हमें एक team जरूर बनानी चाहिए जो उस problem को पकड़ सके। और यह उन लोगो की team होनी चाहिए जिसको इस problem से related skil और knowledge हो।

D3- Containment Action
तुरंत कोई action लेना चाहिए जिससे काम को start किया जा सकेऔर क्या हमारे पास stock ज्यादा qty में है ताकि हमारे production पर कोई effect न पड़े। हमें ध्यान के रखना होगा हम जो भी manufacture कर रहे है उसमे same problem तो नहीं आ रही है या फिर हमने जो action लिया है प्रॉब्लम solve करने के लिए उससे कुछ दूसरी समस्या तो नहीं generate हो रही है। 

D4- Determine the root cause
क्या हमने problem के कारण को खोज लिया है और इस problem के एक कारण है या एक से ज्यादा। 

D5- Verify the root cause
क्या हम sure है हमने जो root cause खोजा है उस problem का real कारण वही है। 

D6- Corrective Action
जो हमने parmanent एक्शन लिया है उसके बारे में हमने सब को बता दिया है  और root cause को review करना और fmea में update करना और हमने जो temprery action लिया गया था उसे remove करना। 

D7- Prevention
हमने सभी action ले लिए है उस problem को रोकने के लिए ताकी वही problem दोबारा न आये हमने problem को same product और process से consider किया है। 

D8-Congratulate the team
टीम को feedback देना हर एक team member को problem में दिए गए योगदान के बारे में identify करवाना और problem solve करने के लिए team member के प्रयासों को सराहना  करना और Successful होने के बाद में team  साथ Celebrate करना। 

what is ppap? production part approval process kya hota hai

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Production part Approval process (PPAP) in hindi. ppap yah ek quality management standard tool hai isme five core tool hote hai. five core tools ppt and pdf list free download  documents list in excel.

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what is ppap?

production part approval process (PPAP) jise hum ppap kahte hai ise 1993 me (AIAG) Automotive Industry Action Group company ne banaya tha start me iska use automotive aur aerospace company me kiya jaata tha lekin ab PPAP ka use kai sari company aur industry me communication aur quality ko sahi karne ke liye kiya jaata hai.

Ppap hame kyo karna chahiye - jo bhi hamara customer hai use batane ke liye ki hamne apke requirement ko achhe se samajh liya hai aur apke quality ki jo requirement hai use hum gain kar sakte hai yah quality ko approve karne ka ek tarika hai. ppap submission ko pura karne ki process kafi difficult hai yah process important elements  ka collection hai jise veryfi karne ke liye pura kiya jaana chahiye jisse production process me better quality wale product produced kiye jaaye.
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ppap ko 5 parts me alag kiya gaya hai -

Level- 1. Part Submission Warrant (PSW) yah customer ke pass jama karna hai aur report dena hai.
Level- 2. PSW(Part Submission Warrant) ke sath me  product ka samples aur  dimensional report  dena padta hai. 
Level- 3. psw aur product sample aur complete supporting data submit karna padta hai.
Level- 4. psw aur other requirements jo customer ki requirement ho submit karna padta hai.
Level- 5. psw,product sample aur coplete supporting data submit karna padega iske alawa customer supplier ke yaha aakar review karta hai jaha par manufacturing kiya jaata hai.

PPAP process me 18 document required hai -
  1. Design record
  2. Engineering change documents
  3. customer engineering approval
  4. Design FMEA
  5. process flow daigram
  6. process fmea
  7. control plan
  8. MSA(Measurement system analysis)
  9. Dimentional results
  10. Material test performance report
  11. initial process study
  12. Qualified laboratory documents
  13. AAP apperience approval report
  14. sample product
  15. master sample
  16. checking Aids
  17. customer specific requirements
  18. Part submission requirements.
yaha par har ek documents me different different lable ki requirements different different hoti hai.

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S-means:- hum customer ko ek document sublit karege aur Supplier ke pass me bhi ek copy rakhege.

*-means:- ccompany ko ek copy apne pass rakhna hai aur jab customer ki requirement hoti hai tab usko submit karna padta hai. Dearhindi.कॉम me aapka swagat hai.



R- means:- documents ko company apne pass me rakhegi aur jab customer ka request ayega tab in records ko sublit karna padta hai.
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what is spc? statistical process control training in hindi

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statistical quality control (SPC)training:- Quality management tool ke five core tool hote hai 1. APQP, 2.FMEA,  3.MSA,  4.SPC,  5.PPAP,

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  1. Advanced Product Quality Planning (APQP) training in hindi
  2. Failure Mode and Effects Analysis (FMEA) training in hindi
  3. Measurement Systems Analysis (MSA) training in hindi
  4. Statistical Process Control (SPC) training in hindi
  5. Product Part Approval Process (PPAP) training in hindi



Introduction of Statistical Process Control (SPC) :- spc industry ke liye koi nayi baat nahi hai 1924 me isko develop kiya gaya tha jinhone ise develop kiya tha unka name  William A. Shewart tha. inhone  Statistical Method from the Viewpoint of Quality Control name ki ek book ko 1939 me publish kiya tha. SPC tool ka use aaj bhi kafi sari industry me spc quality tool ka istemaal kiya jaata hai. spc ki trainig ,training Statistical Process Control, difinition,biginners,example,problem in hindi,spc document in hindi, spc pdf file in hindi,

statistical process control (spc) kya hai:- spc ek mechanism (rule of procedure) hai jisse ki hum process me hone wale variation ko monitor kar sakte hai aur detect bhi kar sakte hai aur baad me hum us par action plan kar sakte hai. spc hame kyo karna chahiye isko use karne ke bahut sare karan ho sakte hai.

spc ka use karne se cost reduce hota hai, rejection aur rework me kami aati hai aur quality me improvement hota hai productivity increse hoti hai, hame advance rahne ke liye advance technic ka istemall karna chahiye. yah hidden process ko uncover karta hai isse customer ko bhi confidence rahega ki ye jo hamara supplier hai jo ki spc method se hamare process ko control kar raha hai.

 statistical process control (spc) teen chijo se bana hua hai  statistical,process aur control.

what is statistics ? kya hota hai.
Hum jab data ko 100% collect karte hai to is kahte hai poppulation lekin generally jo hamara decision  making process hota hai wo 100% data pe nahi hota hai. hum decision lene ke liye kuch sample lete hai aur un sample ke basis pe hum decision karte hai. sample ke basis pe decision making ko statistics kahte hai.

what is process ? kya hota hai 
Process me hum input me out put ko convert karte hai aur isme kuch resourcess ka utilization hota hai.statistics me data ka bahut jyada use hota hai hum process se data lete hai. deta kitne type ke hote hai  basically deta do type ke hote hai 

1.Variable (continuous data)   

variable data me hum basically vernier caliper aur micrometer se jo data lete hai ye sabhi data variable data kahlaate hai.


2. Attribute data (descrete data)

Attributr data me hum jab filler gauge se ya snap gauge se check karet hai inki jo readings aati hai ise hum descrete data kahte hai iske aalawa hamare jo visual inspection hote hai jaise hum kisi parts ka gloss check karte hai high gloss hai ya low gloss hai , shade variation check karte hai,damage hai ki nahi hai,ok kitna ho raha hai reject kitna hota hai hold kitna ho raha hai is tarah ke jo inspection data hote hai ise attribute data ya descrete data kahte hai.

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what is apqp in hindi Advanced Product Quality Planning training

what is apqp in hindi Advanced Product Quality Planning training

APQP होता क्या है - apqp का full-form Advanced Product Quality Planning होता है यह higher level का quality planning होता है।

Quality Management tool ke 5 core tool hote hai-
1-Advanced Product Quality Planning (APQP) 
5-Product Part Approval Process (PPAP)

Advanced product quality planning क्या होता है ?-  यह सिर्फ quality planning नहीं है quality planning से कुछ ज्यादा है। इसमें total team का integration होता है और काफी सारे quality tool का in-walment होता है इसमें cross function team का inwalment होता है। यह एक तरीका है जिससे की supplier customer की requirement को पूरा करे अगर कुछ changes होती है product development के दौरान में तो उसको identify करके उसे समाप्त कर सके। हम सही quality के product को बनाये और कम cost में produced करे।  

What is Quality Planning ?

यह एक systematic तरीका है जिसमे की हम समझते है कि customer की requirement क्या है और क्या हम customer की सारी requirement को पूरा कर सकते है apqp product के development के time में हम इसे plan  करते है किसी भी product के development के समय में हम (apqp) Advanced Product Quality Planning करते है और उस समय में यह planning होती है ताकि हम सारे requirement को  ठीक से समझ ले ताकि आने वाले समय में production start होने के बाद problem कम आये। apqp training pdf and ppt checklist an manual


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Quality planning को plan करने की जरुरत क्यों पड़ती है?
हमें quality planning को plan करने की जरुरत पड़ती है क्यों की हम improve करना चाहते है कि हम जिस problem के बारे में planning कर रहे है हमें एक रास्ता चाहिए की हम properly उसको track कर सके की problem कहा से generate हो रही है। उसे check कर सके planning करने से अगर हमें कुछ problems होती है तो यह हमें suddenly एक new plan बनाने में यह plan help करता है। apqp training pdf and ppt manual checklist

अगर plan नहीं होगा तो failure के chancess ज्यादा होते है planning करने से हम इसे पहली बार में ही successful बना सकते है इससे हमारा quality product best quality का produced होगा हमारे process की cycle time reduced होती है हमारा communication सुधरता है इसके अलावा हम customer satisfaction को सुनिश्चित करते है। 
  • Planning करते समय आपको क्या क्या problems आ सकती है - जिसे हमें दूर करना बहुत जरुरी होता है product के success के लिए -
अगर management का commitment नहीं होगा तो management  focus नहीं करेगी  तो  आपका plan successfull नहीं होगा।  disipline सही नहीं होगा तो भी आपकी planning successful नहीं होगा responsbility अगर आप define नहीं करेंगे की कौन क्या करेगा तो यह plan success नहीं होगा। इस plan के member जो भी है apqp plan  में अगर उन्हें विश्वास ही नहीं होगा की इस प्लान से फायदा होगा तो भी आपका प्लान fail हो सकता है।  resourcess सही नहीं मिलेगी और direction सही नहीं होगा etc.... ये कुछ बाते है जिनसे आपको APQP planning में   failier के chancess बढ़ सकते है।  आपके प्लान में आपको मालूम होना चाहिए ताकि आप पहले इन्हे shortout करे और इन्हे दूर करने की कोशिश करे। जिससे आपकी APQP (''Advanced Product Quality Planning'') Plan की activities में ये internal issues ना हो और आप इसे success बना सके। APQP IN HINDI

Apqp के five phases होते है - जोकि इस प्रकार  है। 
  1. Plan and Define the Program
  2. Product Design and Development 
  3. Process Design and Development
  4. Product and Process Validation
  5. Feedback Assessment and Corrective Action
Plan and Define the Program -
यह phase यह सुनिश्चित करने के लिए design किया गया है कि customer की ज़रूरतें और Expectations स्पष्ट रूप से समझी जाएंगी। इस चरण (phase) का input Full Service Suppliers के लिए contract review द्वारा submitted किया जायेगा

Product Design and Development
यह phase यह सुनिश्चित करता है कि इस area में product design Requirements की पूरी Analysis शामिल है और Design Reliability पर Sign-off के साथ निष्कर्ष निकाला गया है। 

Process Design and Development
यह phase यह  सुनिश्चित करता है कि customer Expectations और Design Requirements को Manufacturing प्रक्रिया में ध्यान से शामिल किया गया है।

Product and Process Validation
यह phase यह  सुनिश्चित करता है कि production validation test और production trail start कर दिया गया है।  
Feedback Assessment and Corrective Action
इससे variation में reduction होता है इसके अलावा management  को प्रदान की गई सेवा के grade से संबंधित quality-policy को develop और documented करना चाहिए। 

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