kids story in hindi किड्स स्टोरी इन हिंदी story for kids in Hindi - Dear Hindi- Meaning in Hindi

4/11/2021

kids story in hindi किड्स स्टोरी इन हिंदी story for kids in Hindi

kids story in hindi किड्स स्टोरी इन हिंदी

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2*कीमती पत्थर kids story in hindi
3*बुद्धि का फल (बादशाह अकबर बीरबल) kids story in hindi
6*चालाक गधा kids story in hindi
7*बिजेता मेढक kids story in hindi
9*हिसाब बराबर kids story in hindi



1-चालाक महिला
चालाक महिला
क दिन एक औरत गोल्फ खेल रही थी, जब उसने बॉल को मारा किया तो वह जंगल में चली गई। 

जब वह बॉल को खोजने गई तो उसे एक मेंढक मिला जो जाल में फंसा हुआ था।

मेंढक ने उससे कहा - "अगर तुम मुझे इससे आजाद कर दोगी तो मैं तुम्हें तीन वरदान दूँगा। 

और यह सुनकर महिला ने उसे आजाद कर दिया

मेंढक ने कहा - "धन्यवाद, लेकिन तीन वरदानों में मेरी एक शर्त है जो भी तुम माँगोगी तुम्हारे पति को उससे दस गुना मिलेगा। 

महिला ने कहा - "ठीक है" उसने पहला वरदान मांगा कि मैं संसार की सबसे खुबसूरत स्त्री बनना चाहती हूँ। 

मेंढक ने उसे कहा - "क्या तुम्हें पता है कि ये वरदान तुम्हारे पति को संसार का सबसे सुंदर व्यक्ति बना देगा। 

महिला बोली - क्योंकि मैं संसार की सबसे खुबसूरत स्त्री बन जाऊँगी और वो मुझे ही देखेंगे। 

मेंढक ने कहा - "ठीक है "

अपने दूसरे वरदान में उसने कहा कि मैं संसार की सबसे धनी महिला बनना चाहती हूँ।

मेंढक ने कहा - "यह तुम्हारे पति को विश्व का सबसे धनी पुरुष बना देगा और वो तुमसे दस गुना पैसे वाला होगा"

महिला ने कहा - कोई बात नहीं मेरा सब कुछ उसका है और उसका सब कुछ मेरा। 

मेंढक ने कहा - "ठीक है "

जब मेंढक ने अंतिम वरदान के लिये कहा तो उसने अपने लिए एक "हल्का सा हर्ट अटैक मांगा"

मोरल ऑफ स्टोरीः महिलाएं बुद्धिमान होती हैं, उनसे बच के रहें !

महिला पाठकों से निवेदन है आगे ना पढें, आपके लिये जोक यहीं खत्म हो गया है । यहीं रुक जाएँ और अच्छा महसूस करें !!

पुरुष पाठकः कृपया आगे पढें।

उसके पति को उससे "10 गुना हल्का हार्ट अटैक" आया। 

मोरल ऑफ द स्टोरी : महिलाएं सोचती हैं वे वास्तव में बुद्धिमान हैं। 

उन्हें ऐसा सोचने दो, क्या फर्क पडता है। 


2-कीमती पत्थर

कीमती पत्थर

क युवक कविताएँ लिखता था, लेकिन उसके इस गुण का कोई मूल्य नहीं समझता था। घरवाले भी उसे ताना मारते रहते कि तुम किसी काम के नहीं, बस कागज काले करते रहते हो। 

उसके अन्दर हीन-भावना भर गयी।  उसने एक  मित्र को अपनी यह व्यथा बतायी। 

मित्र  ने उसे एक पत्थर देते हुए कहा – जरा मेरा एक काम कर दो। यह एक कीमती पत्थर है। कई तरह के लोगो से इसकी कीमत का पता लगाओ, बस इसे बेचना मत। युवक पत्थर लेकर चला गया।  वह पहले एक कबाड़ी वाले के पास गया। कबाड़ी वाला बोला – पांच रुपये में मुझे ये पत्थर दे दो।

फिर वह सब्जी वाले के पास गया। उसने कहा तुम एक किलो आलू के बदले यह पत्थर दे दो, 

इसे मै बाट की तरह इस्तेमाल कर लूँगा। युवक मूर्तिकार के पास गया। 

मूर्तिकार ने कहा – इस पत्थर से मै मूर्ति बना सकता हूँ, तुम यह मुझे एक हजार में दे दो। आख़िरकार युवक वह पत्थर लेकर रत्नों के विशेषज्ञ के पास गया। 

उसने पत्थर को परखकर बताया – यह पत्थर बेशकीमती हीरा है जिसे तराशा नहीं गया। करोड़ो रुपये भी इसके लिए कम होंगे। युवक जब तक अपने जौहरी मित्र के पास आया, तब तक उसके अन्दर से हीन भावना गायब हो चुकी थी। और उसे एक सन्देश मिल चुका था।

मोरल : हमारा जीवन बेशकीमती है, बस उसे विशेषज्ञता के साथ परखकर उचित जगह पर उपयोग करने की आवश्यकता है। 

बुद्धि का फल
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3-बुद्धि का फल (बादशाह अकबर बीरबल )

क time की बात है कि बादशाह अकबर के दरबार में लंका के राजा का एक दूत पहुँचा।  उसने बादशाह अकबर से एक नयी तरह की माँग करते हुए कहा –

आपके दरबार में एक से बढ़कर एक बुद्धिमान, होशियार तथा बहादुर दरबारी मौजूद हैं।  हमारे महाराज ने आपके पास मुझे एक घड़ा भरकर बुद्धि लाने के लिए भेजा है।  हमारे महाराज को आप पर पूरा भरोसा है कि आप उसका बन्दोबस्त किसी-न-किसी तरह और जल्दी ही कर देंगे।

यह सुनकर बादशाह अकबर चकरा गए ।

उन्होंने अपने मन में सोंचा – “ क्या बेतुकी माँग है, भला घड़े भर बुद्धि का बन्दोबस्त कैसे किया जा सकता है ? लगता है।  लंका का राजा हमारा मजाक बनाना चाहता है, कहीं वह इसमें सफल हो गया तो। 

तभी बादशाह को बीरबल का ध्यान आया, वे सोचने लगे कि शायद यह कार्य बीरबल के वश का भी न हो, मगर उसे बताने में बुराई ही क्या है ?

जब बीरबल को बादशाह के बुलवाने का कारण ज्ञात हुआ तो वह मुस्कराते हुए कहने लगे – “ जहांपनाह! चिन्ता की कोई बात नहीं, बुद्धि की व्यवस्था हो जाएगी, लेकिन इसमें कुछ हफ्ते का वक़्त लग सकता है। ”

बादशाह अकबर बीरबल की इस बात पर कहते भी तो क्या, बीरबल को मुँह माँगा समय दे दिया गया। 

बीरबल ने उसी दिन शाम को अपने एक खास नौकर को आदेश दिया – “ छोटे मुँह वाले कुछ मिट्टी के घड़ों की व्यवस्था करो ”

नौकर ने फ़ौरन बीरबल की आज्ञा का पालन किया। 

घड़े आते ही बीरबल अपने नौकर को लेकर कददू की एक बेल के पास गए। उन्होंने नौकर से एक घड़ा ले लिया, बीरबल ने घड़े को एक कददू के फूल पर उल्टा लटका दिया, इसके बाद उन्होंने सेवक को आदेश दिया कि बाकि सारे घड़ों को भी इसी तरह कददू के फूल पर उल्टा रख दें। 

बीरबल ने इस काम के बाद सेवक को इन घड़ों की देखभाल सावधानीपूर्वक करते रहने का हुक्म दिया और वहाँ से चले गए। 

बादशाह अकबर ने कुछ दिन बाद इसके बारें में पूछा, तो बीरबल ने तुरन्त उत्तर दिया – “ जहांपनाह! कार्य हो चुका समझें, बस दो सप्ताह का समय और चाहिए, उसके बाद पूरा घड़ा बुद्धि से लबालब भर जायेगा ”

बीरबल ने पन्द्रह दिन के बाद घड़ों के स्थान पर जाकर देखा कि कददू के फल घड़े जितने बड़े हो गए हैं, उन्होंने नौकर की प्रशंसा करते हुए कहा – “तुमने अपनी जिम्मेदारी बड़ी कुशलतापूर्वक निभायी है, इसके लिए हम तुम्हे इनाम देंगे”

इसके बाद बीरबल ने लंका के दूत को बादशाह अकबर के दरबार में बुलाया और उसे बताया कि बुद्धि का घड़ा लगभग तैयार है। और बीरबल ने तुरन्त ताली बजाई, ताली की आवाज सुनकर बीरबल का सेवक एक बड़ी थाली में घड़ा लिए हुए बड़ी शान से दरबार में हाज़िर हुआ। 

बीरबल ने घड़ा उठाया और उसे लंका के दूत के हाथ में सौंपते हुए कहा – “ लीजिए श्रीमान आप इसे अपने महाराज को भेंट कर दीजिए, लेकिन एक बात अवश्य ध्यान रखियेगा कि खाली होने पर हमारा यह कीमती बर्तन हमें जैसा-का –तैसा वापस मिल जाना चाहिए।  इसमें रखा बुद्धि का फल तभी प्रभावशाली होगा जब इस बर्तन को कोई नुकसान न पहुँचे। 

इस पर दूत ने कहा –“ हुजूर ! क्या मैं भी इस बुद्धि के फल को देख सकता हूँ ”

“हाँ ..हाँ जरुर। ” बीरबल ने गर्दन हिलाते हुए कहा। 

घड़े देखकर परेशान होते हुए दूत ने मन-ही–मन सोंचा –“हमारी भी मति मारी गई है।  भला हमें भी क्या सूझी, बीरबल का कोई जवाब नहीं है ....भला ऐसी बात मैंने सोची कैसे ?”

घड़ा लेकर दूत के जाते ही बादशाह अकबर ने भी घड़े को देखने की इच्छा प्रकट की।  और बीरबल ने एक घड़ा मँगवा दिया ।

जैसे ही उन्होंने घड़े में झाँका उन्हें हँसी आ गयी। वे बीरबल की पीठ ठोकते हुए बोले –“ मान गए भई ! तुमने बुद्धि का क्या शानदार फल पेश किया है, लगता है इसे पाकर लंका के राजा के बुद्धिमान होने में तनिक भी देर नहीं लगेगी ”

ज्ञानीपुरुषऔरनिंदा

4-ज्ञानी पुरुष और निंदा

व्यापारी एक नया व्यवसाय शुरू करने जा रहा था लेकिन आर्थिक रूप से मजबूत ना होने के कारण उसे एक हिस्सेदार की जरुरत थी।  कुछ ही दिनों में उसे एक अनजान आदमी मिला और वह हिस्स्सेदार बनने को तैयार हो गया। व्यापारी को उसके बारे में ज्यादा कुछ मालुम नहीं था।  अत: पहले वह हिस्सेदार बनाने से डर रहा था किन्तु थोड़ी पूछताछ करने के बाद उसने उस आदमी के बारें में विचार करना शुरू किया। 

एक दो दिन बीतने के पश्चात् व्यापारी को उसका एक मित्र मिला जो की बहुत ज्ञानी पुरुष था। हाल समाचार पूछने के बाद व्यापारी ने उस आदमी के बारें में अपने मित्र को बताया और अपना हिस्सेदार बनाने के बारें में पूछा।उसका मित्र उस आदमी को पहले से ही जानता था जो की बहुत कपटी पुरुष था वह लोगो के साथ हिस्सेदारी करता फिर उन्हें धोखा देता था। 

चूँकि उसका मित्र एक ज्ञानी पुरुष था।अत: उसने सोचा दूसरों की निंदा नहीं करनी चाहिए और उसने व्यापारी से कहा -" वह एक ऐसा व्यक्ति है जो आसानी से तुम्हारा विश्वास जीत लेगा।" यह सुनने के बाद व्यापारी ने उस आदमी को अपना हिस्सेदार बना लिया।दोनों ने काफी दिन तक मेहनत की और बाद में जब मुनाफे की बात आयी तो वह पूरा माल लेकर चम्पत हो गया।

इस पर व्यापारी को बहुत दुःख हुआ । वह अपने मित्र से मिला और उसने सारी बात बतायी और उसके ऊपर बहुत गुस्सा हुआ इस पर उसके मित्र ने कहा मैं ठहरा शास्त्रों का ज्ञाता मैं कैसे निंदा कर सकता हूँ । व्यापारी बोला- वाह मित्र ! तुम्हारे ज्ञान ने तो मेरी लुटिया डुबो दी।

मोरल : यदि आप के ज्ञान से किसी का अहित होता है तो किसी काम का नहीं है ।

आदमीएकरूपतीन

5-आदमी एक रूप तीन

क बार बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- ‘‘क्या तुम हमें तीन तरह की खूबियाँ एक ही आदमी में दिखा सकते हो?''

‘‘जी हुजूर, पहली तोते की, दूसरी शेर की, तीसरी गधे की। परन्तु आज नहीं, कल। '' बीरबल ने कहा।

‘‘ठीक है, तुम्हें कल का समय दिया जाता है। '' बादशाह ने इजाजत देते हुए कहा।

अगले दिन बीरबल एक व्यक्ति को पालकी में डालकर लाया और उसे पालकी से बाहर निकाला। फिर उस आदमी को शराब का एक पैग दिया। शराब पीकर वह आदमी डरकर बादशाह से विनती करने लगा- ‘‘हुजूर! मुझे माफ कर दो। मैं एक बहुत गरीब आदमी हूं। ''

बीरबल ने बादशाह को बताया- ‘‘यह तोते की बोली है। ''

कुछ देर बाद उस आदमी को एक पैग और दिया तो वह नशे में बादशाह से बोला- '' अरे जाओ, तुम दिल्ली के बादशाह हो तो क्या, हम भी अपने घर के बादशाह हैं। हमें ज्यादा नखरे मत दिखाओ।''

बीरबल ने बताया- ‘‘यह शेर की बोली है। '' कुछ देर बाद उस आदमी को एक पैग और दिया तो वह नशे में एक तरफ गिर गया और नशे में ऊटपटांग बड़बड़ाने लगा।

बीरबल ने उसे एक लात लगाते हुए बादशाह से कहा- ‘‘हुजूर! यह गधे की बोली है। ''

बादशाह बहुत खुश हुए।

चालाकगधा
6-चालाक गधा

क दिन एक किसान का गधा कुएँ में गिर गया। वह गधा घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढा हो चूका था, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिए। 

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है, वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा । और फिर, अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे-वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और ऊपर चढ़ आता । जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह गधा कुएँ के किनारे पर पहुँच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।

ध्यान रखो, तुम्हारे जीवन में भी तुम पर बहुत तरह कि मिट्टी फेंकी जायेगी, बहुत तरह कि गंदगी तुम पर गिरेगी। जैसे कि, तुम्हे आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही तुम्हारी आलोचना करेगा,कोई तुम्हारी सफलता से ईर्ष्या के कारण तुम्हे बेकार में ही भला बुरा कहेगा । कोई तुमसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो तुम्हारे आदर्शों के विरुद्ध होंगे। ऐसे में तुम्हे हतोत्साहित होकर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हिल-हिल कर हर तरह कि गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख लेकर आगे बढे। 

बिजेतामेढक

7-विजेता मेंढक
हुत समय पहले की बात है एक सरोवर में बहुत सारे मेंढक रहते थे। सरोवर के बीचों-बीच एक बहुत पुराना धातु का खम्भा भी लगा हुआ था। जिसे उस सरोवर को बनवाने वाले राजा ने लगवाया था। खम्भा काफी ऊँचा था और उसकी सतह भी बिलकुल चिकनी थी।

एक दिन मेंढकों के दिमाग में आया कि क्यों ना एक रेस करवाई जाए। रेस में भाग लेने वाली प्रतियोगियों को खम्भे पर चढ़ना होगा, और जो सबसे पहले एक ऊपर पहुच जाएगा वही विजेता माना जाएगा। रेस का दिन आ पहुँचा, चारो तरफ बहुत भीड़ थी, आस-पास के इलाकों से भी कई मेंढक इस रेस में हिस्सा लेने पहुचे। माहौल में सरगर्मी थी, हर तरफ शोर ही शोर था।

रेस शुरू हुई लेकिन खम्भे को देखकर भीड़ में एकत्र हुए किसी भी मेंढक को ये यकीन नहीं हुआ कि कोई भी मेंढक ऊपर तक पहुंच पायेगा …

हर तरफ यही सुनाई देता …

“ अरे ये बहुत कठिन है ”

“ वो कभी भी ये रेस पूरी नहीं कर पायंगे ”

“ सफलता का तो कोई सवाल ही नहीं, इतने चिकने खम्भे पर चढ़ा ही नहीं जा सकता ”

और यही हो भी रहा था, जो भी मेंढक कोशिश करता, वो थोडा ऊपर जाकर नीचे गिर जाता, कई मेंढक दो-तीन बार गिरने के बावजूद अपने प्रयास में लगे हुए थे …

पर भीड़ तो अभी भी चिल्लाये जा रही थी, “ ये नहीं हो सकता, असंभव ”, और वो उत्साहित मेंढक भी ये सुन-सुनकर हताश हो गए और अपना प्रयास छोड़ दिया।

लेकिन उन्ही मेंढकों के बीच एक छोटा सा मेंढक था, जो बार-बार गिरने पर भी उसी जोश के साथ ऊपर चढ़ने में लगा हुआ था …. वो लगातार ऊपर की ओर बढ़ता रहा, और अंततः वह खम्भे के ऊपर पहुच गया और इस रेस का विजेता बना।

उसकी जीत पर सभी को बड़ा आश्चर्य हुआ, सभी मेंढक उसे घेर कर खड़े हो गए और पूछने लगे , “ तुमने ये असंभव काम कैसे कर दिखाया, भला तुम्हे अपना लक्ष्य प्राप्त करने की शक्ति कहाँ से मिली, ज़रा हमें भी तो बताओ कि तुमने ये विजय कैसे प्राप्त की। 

उबलतेपानीऔरमेढक

8-उबलते पानी और मेंढक

क बार एक मेंढक के शरीर में बदलाव करने की क्षमता को जाँचने के लिए कुछ वैज्ञानिकों ने उस मेंढक को एक काँच के जार में डाल दिया और उसमे जार की आधी ऊंचाई तक पानी भर दिया । फिर उस जार को धीरे धीरे गर्म किया जाने लगा, जब गर्मी बर्दाश्त से बाहर हो जाये तब मेंढक उस जार से बाहर कूद  सके इसलिए, जार का मुँह ऊपर से खुला रखा गया ।

मेंढक को अपने शरीर में गर्मी महसूस हुई और अपने शरीर की ऊर्जा को उसने अपने आपको बाहर की गर्मी से तालमेल बिठाने में लगाना शुरू किया ! मेंढक के शरीर से पसीना निकलने लगा, वो अपनी ऊर्जा का उपयोग तालमेल बिठाने में लगा रहा था, एक वक़्त ऐसा आया की मेंढक की गर्मी से और लड़ने की क्षमता कम होने लगी, और मेंढक ने जार से बाहर कूदने की कोशिश की, मगर वो बाहर जाने की बजाय पानी में गिर जाया करता और बार बार की कोशिश के बाद भी मेंढक बाहर नही निकल पाया क्यूँकि बाहर कूदने में लगने वाली शक्ति वो गर्मी से लड़ने में पहले ही ज़ाया कर चुका था, तो अगर सही वक़्त पे मेंढक कूदने का फ़ैसला लेता तो शायद उसकी जान बच सकती थी ।

हमें अपने आसपास के माहौल से लड़ना तो ज़रूर है लेकिन सही वक़्त आने और पर्याप्त ऊर्जा रहते उस माहौल से बाहर निकलना भी ज़रूरी है !!

हिसाबबराबर
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9-हिसाब बराबर
क डॉक्टर ने नया-नया क्लीनिक खोला तो बाहर बोर्ड टाँग दिया, जिस पर लिखा था, "किसी भी बीमारी का इलाज़ मात्र 300/- रुपये में और अगर हम आपका इलाज़ नहीं कर पाये तो हम आपको 1000/- रुपये देंगे।"

यह बोर्ड पढ़कर एक दिन एक आदमी के मन में ख्याल आया कि क्यों न कोई चालाकी की जाये और 1000/- रुपये कमाये जाएँ। इसी सोच के साथ आदमी डॉक्टर के पास पहुँच गया।

डॉक्टर: आईये बैठिये, बताइये क्या तक़लीफ है आपको?

आदमी: डॉक्टर साहब, मैं अपना स्वाद खो चुका हूँ। कुछ भी खाता या पीता हूँ तो स्वाद का पता ही नहीं चलता।

डॉक्टर ने पूरी बात सुनी और नर्स से कहा कि 22 नंबर वाली बोतल में से कुछ बूंदे इनकी जीभ पर डाल दो। नर्स से जैसे ही बूंदे आदमी की जीभ पर डाली, आदमी एक दम से चिल्लाया, "यह तो पेशाब है।"

डॉक्टर: मुबारक हो आपका स्वाद वापस आ गया।

आदमी बहुत शर्मिंदा हुआ और उसे 300/- रूपये भी गंवाने पड़े। कुछ दिनों बाद वो फिर से डॉक्टर के पास अपना हिसाब बराबर करने पहुँच गया।

डॉक्टर: जी अब क्या तकलीफ हो गयी।

आदमी: डॉक्टर साहब, मैं अपनी यादाश्त कमज़ोर हो गयी है।

डॉक्टर ने नर्स से कहा कि 22 नंबर वाली बोतल में से दवाई निकाल कर इनको दो। यह सुन कर आदमी तुरंत बोला, "डॉक्टर साहब वो दवाई तो स्वाद वापस लाने के लिए है न।"

डॉक्टर: मुबारक हो आपकी यादाश्त भी वापस आ गयी है।

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